जबकि यह कुण्ड सरकार द्वारा घोषित हेरिटेज कुण्ड में आता है. ऑक्सीजन की कमी से यह तड़प कर मर गई. परम्परा निभाने की कुछ लोगों के ढकोसलावदी जिद्द पर इन जलीय जीवों का जीवन असमय खत्म हो गया. इनके अलावा इस तालाब में दुर्लभ प्रजाति के कछुए भी हैं उनके जीवन पर संकट गहरा सकता हैं. नगर निगम वाराणसी द्वारा एक तालाब से चन्द कदम की दूरी पर जल संस्थान परिसर में कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाया गया था लेकिन वहां मूर्ति विसर्जन नहीं किया गया. स्थानीय लोगों ने शंकुल धारा में मूर्ति विसर्जन न करने का अनुरोध भी पूजा समितियों से किया था लेकिन कुछ धर्म के तथाकथित दलाल लोगों की जिद्द के आगे कुछ नहीं हो सका और आखिकार बेजुबानों की मौत हो गई. इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं.
प्रशासन की तरफ से किसी ने भी इस कुंड की सुधी नहीं ली. इस कुण्ड के सुंदरीकरण में अप्रैल 2025 लाखों रूपये सरकार द्वारा खर्च किया गया था जिसका परिणाम भी सामने आया था. लेकिन धर्म के नाम पर कुछ मुट्ठी भर दलालों ने इस कुण्ड को विकृत कर दिया जो अत्यन्त ही दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे व्यक्तियों को चिन्हित कर एफ आई आर दर्ज कर प्रशासन उचित कार्रवाई करे और सुनिश्चित करें कि भविष्य में अब इस या किसी भी कुंड में मूर्ति विसर्जन नहीं किया जायेगा. वरना यह आन्दोलन निरन्तर जोरदार तरीके से चलेगा और हर हाल में मूर्ति विसर्जन को रोकेगा.










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