पूरे भारत में यदि किसी मुख्यमंत्री के नाम की सबसे अधिक चर्चा होती है, तो वह योगी आदित्यनाथ हैं। ईमानदारी, सादगी, दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण उनकी पहचान है। उन्होंने केवल शासन नहीं किया, बल्कि अपने कार्यों और निर्णयों से करोड़ों लोगों के दिलों में विश्वास और सम्मान अर्जित किया है।
समय-समय पर कुछ लोग और उनकी ही पार्टी के कुछ तथाकथित “शकुनी” ऐसे घटनाक्रम खड़े करने का प्रयास करते हैं, जिनसे उनकी छवि को धूमिल किया जा सके। लेकिन बाबा विश्वनाथ और माँ अन्नपूर्णा की कृपा जिस पर हो, उसका कोई बाल भी बाँका नहीं कर सकता। जनता का अटूट विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।
हाल ही में सामने आई एक तस्वीर ने उनके समर्थकों को भावुक कर दिया। उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री, जिनकी लोकप्रियता और नेतृत्व ने भाजपा को कई राज्यों में नई ऊर्जा दी, यदि सार्वजनिक मंच पर उनके सम्मान और गरिमा का पूरा ध्यान न रखा जाए, तो स्वाभाविक रूप से करोड़ों समर्थकों के मन में सवाल उठते हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद निस्संदेह अत्यंत सम्माननीय है और उसका आदर होना चाहिए। लेकिन यह भी स्मरण रखना आवश्यक है कि योगी आदित्यनाथ केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। ऐसे में मंच पर उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह उनके पद, व्यक्तित्व और जनसमर्थन के अनुरूप सम्मान प्रदर्शित करे।
यदि किसी मंच पर पहले उपमुख्यमंत्री का अभिवादन किया जाए और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की उपेक्षा दिखाई दे, तो यह दृश्य उनके चाहने वालों को स्वाभाविक रूप से खटकता है। सम्मान देने से सम्मान मिलता है, जबकि उपेक्षा और छल का उत्तर अंततः जनता अपने जनसमर्थन से देती है।
आज योगी आदित्यनाथ किसी एक प्रदेश के नेता भर नहीं हैं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आशा, विश्वास और सुशासन की पहचान बन चुके हैं। उनके साथ जुड़ने के लिए लाखों लोग उत्सुक हैं। समय ने यह भी सिद्ध किया है कि भाजपा के जनाधार को मजबूत करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
जनता सब देख रही है, सब समझ रही है। लोकतंत्र में अंतिम फैसला किसी मंच, पद या तस्वीर से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और जनादेश से होता है।









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