योग रोगों का सबसे सटीक उपचार है। शारीरिक और मानसिक संतुलन, प्राणायाम (श्वास नियंत्रण) और आसनों के नियमित अभ्यास से असाध्य रोगों व त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) का समूल नाश होता है। वेदों में भी योग को सर्वांगीण स्वास्थ्य का आधार माना गया है । वेद, उपनिषद और आयुर्वेद के प्राचीन सिद्धांतों पर आधारित योग, निरोगी जीवन के लिए सर्वश्रेष्ठ विज्ञान है।

गंगा तट पर योग का अभ्यास शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से बेहद परिवर्तनकारी है। बहते हुए जल, शुद्ध हवा और प्राकृतिक वातावरण के बीच योग करने से मन शांत होता है, प्राण ऊर्जा बढ़ती है और आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है।प्राचीन काल से ही गंगा तट मुनियों और साधकों की तपोभूमि रहे हैं। यहाँ योग करने से आत्म-खोज और आंतरिक जागरण में सहायता मिलती है ।











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