चन्दौली डीडीयू नगर
जमीन और मकान विवाद से जुड़े चर्चित मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रभावित लोगों के मकान या निर्माण को बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए नहीं तोड़ा जा सकता। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि किसी भी कार्रवाई से पहले सभी प्रभावित पक्षों को पूरा अवसर दिया जाए और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
यह मामला विजय कुमार व 21 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनकी जमीन और मकान वैध रूप से खरीदे गए हैं तथा वे लंबे समय से उस पर कब्जे में हैं। उन्होंने मांग की थी कि प्रशासन को उनके भवनों पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई से रोका जाए।
वहीं, सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि संबंधित भूमि सड़क के रूप में उपयोग में है और याचिकाकर्ताओं का दावा सही नहीं है। हालांकि सरकारी पक्ष ने यह भी भरोसा दिया कि “Due Process of Law” (कानूनी प्रक्रिया) का पालन किए बिना कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं हो रहा था कि पहले जारी किए गए नोटिस सभी प्रभावित लोगों तक विधिवत पहुंचे थे या नहीं। इसी आधार पर अदालत ने प्रशासन को नई प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए।
हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश
🔹 किसी भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई से पहले सभी प्रभावित पक्षों को फ्रेश नोटिस (Fresh Notice) जारी किया जाए।
🔹 सभी संबंधित लोगों को अपना जवाब दाखिल करने का पूरा अवसर दिया जाए।
🔹 सक्षम अधिकारी व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान करे।
🔹 जिन दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई प्रस्तावित है, उनकी प्रतियां संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाएं।
🔹 इसके बाद ही अंतिम प्रशासनिक आदेश (Final Administrative Order) पारित किया जाए।
आदेश का क्या मतलब है?
इस आदेश का सीधा अर्थ यह है कि प्रशासन तत्काल बुलडोजर कार्रवाई नहीं कर सकता। पहले नोटिस देना, सुनवाई करना और कानूनी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा।
हालांकि अदालत ने अभी यह अंतिम फैसला नहीं दिया है कि जमीन का स्वामित्व किसके पक्ष में है या मुआवजा मिलेगा या नहीं। यह प्रश्न आगे की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया में तय होगा।
वकील बलबीर सिंह ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता बलबीर सिंह के अनुसार, अदालत ने पहले की गई नोटिस और ध्वस्तीकरण संबंधी कार्रवाई को समाप्त मानते हुए प्रशासन को नई प्रक्रिया से कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पहले व्यापारियों का पक्ष सुना जाएगा, संबंधित दस्तावेज दिखाए जाएंगे और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश में “110” संबंधी किसी दावे का उल्लेख नहीं है।
अधिवक्ता ओम प्रकाश का बयान
इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता ओम प्रकाश ने कहा कि न्यायालय ने प्रशासन से प्राप्त पक्ष को पर्याप्त नहीं माना और स्पष्ट निर्देश दिया कि नई नोटिस जारी कर दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए तथा Reasoned and Speaking Order (कारण सहित स्पष्ट आदेश) पारित किया जाए।
महत्वपूर्ण बात
फिलहाल अदालत ने याचिका का निस्तारण (Disposed of) कर दिया है, लेकिन इससे प्रभावित पक्षों के अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं। यदि भविष्य में नियमों का पालन किए बिना कार्रवाई होती है तो संबंधित लोग दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं।











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