यथार्थ नर्सिंग कॉलेज के छात्रों ने वृद्धाश्रम में किया शैक्षणिक भ्रमण, बुजुर्गों की सेवा कर जीता आशीर्वाद

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चंदौली    स्थित यथार्थ नर्सिंग कॉलेज एंड पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट के छात्र-छात्राओं ने अपने शैक्षणिक कार्यक्रम के तहत स्थानीय वृद्धाश्रम का भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने वृद्धाश्रम में निवास कर रहे बुजुर्गों की व्यक्तिगत देखभाल करते हुए सेवा और संवेदनशीलता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।भ्रमण के दौरान छात्रों ने वृद्धजनों के नाखून काटने, बाल संवारने जैसी व्यक्तिगत साफ-सफाई संबंधी सेवाएँ दीं। इसके साथ ही उन्होंने अंगवस्त्र और यथार्थ गीता प्रदान कर बुजुर्गों को सम्मान और आत्मीयता का अनुभव कराया। छात्रों के इस कार्य से वृद्धजन भावुक हो उठे और उन्होंने बच्चों को आशीर्वाद दिया।

 

कॉलेज प्राचार्य डॉ. जेनेट जे ने कहा कि “नर्सिंग और पैरामेडिकल क्षेत्र में सेवा भाव सबसे बड़ी पहचान है। छात्रों ने वृद्धजनों की सेवा कर यह साबित किया है कि सच्ची शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि करुणा और संवेदना से परिपूर्ण होती है।”कॉलेज प्रबंधक डॉ. धनंजय ने बताया कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से छात्रों में सेवा की भावना, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी की समझ विकसित होती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी कॉलेज इसी प्रकार समाजहितकारी कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।

 

कार्यक्रम के सफल आयोजन में कॉलेज के शिक्षकगण एवं स्टाफ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस सेवा कार्य ने विद्यार्थियों को न केवल व्यावहारिक शिक्षा का अनुभव दिया, बल्कि मानवता के प्रति गहरी समझ भी प्रदान की।इस मौके पर कॉलेज छात्र/छात्राओं के साथ मौजूद अध्यापक अनुराधा प्रजापति ने कहा कि “बुजुर्ग हमारे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी सेवा और देखभाल करना ही असली मानवता है। विद्यार्थियों को ऐसे अनुभवों से जीवन में धैर्य, संवेदनशीलता और सेवा भाव विकसित होता है।”

 

उन्होंने आगे कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल क्षेत्र में कार्यरत छात्रों के लिए यह अनुभव अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें सिर्फ पेशेवर रूप से नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानवीय दृष्टिकोण से भी मजबूत बनाता है।तथा साथ ही छात्रों के साथ मौजूद अध्यापक प्रज्ञा त्रिपाठी ने कहा कि “नर्सिंग और पैरामेडिकल के छात्रों के लिए मानवीय मूल्यों की समझ बेहद जरूरी है। पाठ्यपुस्तकें ज्ञान देती हैं, लेकिन इस तरह का अनुभव छात्रों को जीवन की सच्चाई से जोड़ता है। वृद्धजन हमारे समाज का अनुभव-संपन्न स्तंभ हैं और उनकी देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है।”

 

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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