वाराणसी।
धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी इन दिनों जुए-सट्टे और लॉटरी जैसे अवैध कारोबार का गढ़ बन चुकी है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के निर्देश पर गठित एसओजी-2 की टीम लगातार छापेमारी कर रही है और कई जुआ अड्डों को ध्वस्त कर चुकी है। लेकिन इसके बावजूद इस धंधे के बड़े मगरमच्छ अब तक कानून की पकड़ से बाहर हैं।
जुए का सिंडिकेट चलाने वाले चेहरे
सूत्रों के मुताबिक, शहर में सक्रिय सबसे बड़े जुए के नेटवर्क का सरगना राजा बाबू अग्रहरि जैसे नामचीन चेहरे हैं। इसके खिलाफ लगातार शिकायत के बाद भी तक पुलिस की कोई कार्यवाही नहीं हुई है। बताया जाता है कि ये लोग छोटे गुर्गों को पकड़वाकर खुद बच जाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक कैंट थाना अंतर्गत मिंट हाउस पर लग्जरी बस स्टैंड जिसको राजा साहब की कोठी भी कहा जाता है। राजा बाबू अग्रहरि द्वारा बड़े स्तर पर जुए का सिंडिकेट संभवत चलाया जा रहा है। स्टैंड के बाहर राम भंडार मिष्ठान, चम्पारण मटन की दुकान और उसके आस पास उसके गुर्गे बैठे रहते हैं।
कैंट थाना के संज्ञान में है तो ठीक है। पुलिस आयुक्त महोदय। एक संयुक्त और गोपनीय टीम के साथ छापा मारेंगे। सच्चाई सामने आएगी।
मिंट हाउस और आसपास के इलाके राजा बाबू अग्रहरि ने जुए के गढ़ बना दिया हैं। यहां बाकायदा काउंटर और ठिकाने चल रहे हैं, जहां हर दिन करोड़ों का जुआ सट्टा खेला जा रहा है।सूत्रों के अनुसार कैंट थाना क्षेत्र के अपराधी प्रवृति का राजा बाबू अग्रहरि और उसका भाई और गुर्गे बड़े पैमाने पर जुआ सट्टा का कारोबार काफी दिनों से कर रहा है
सूत्र बताते हैं यहां ऑनलाइन जुआ खेलवाने का धंधा लम्बे समय से चल रहा है जिसमें स्थानीय नेताओं और कुछ पुलिसकर्मियों की संरक्षण राजा बाबू अग्रहरि को प्राप्त होने की बात भी सामने आई है। जुआ की अवैध कमाई से अपराधी प्रवृति का राजा बाबू अग्रहरि कई नमी बेनामी संपत्ति का मालिक बन बैठा है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों पर खेल
जुआ सिंडिकेट अब सिर्फ ताश के पत्तों तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन लॉटरी और मोबाइल एप के जरिए सट्टा खिलवाने का धंधा तेजी से फैल रहा है। लोगों को आसान लालच देकर जाल में फंसाया जाता है और मोटा मुनाफा वसूला जाता है।
एसओजी-2 की मेहनत, मगर बड़े नाम अब भी बाहर
एसओजी-2 ने हाल ही में कई छोटे जुआरियों को पकड़कर जेल भेजा है और कई अड्डों पर ताले लगवा दिए हैं। लेकिन मुख्य सरगना अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। वाराणसी पुलिस की यह बड़ी चुनौती बन गई है कि आखिर इतने छापेमारी और कार्रवाई के बावजूद जुए के मगरमच्छ कानून के शिकंजे से कैसे बच जा रहे हैं?
जनता में गुस्सा, पुलिस पर सवाल
वाराणसी जैसे धार्मिक शहर में खुलेआम जुआ-सट्टे का कारोबार होना लोगों के लिए चिंता का विषय है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पुलिस की कार्रवाई सिर्फ छोटे खिलाड़ियों तक सीमित है या फिर बड़े मगरमच्छों को राजनीतिक-सामाजिक संरक्षण मिल रहा है?










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