हनुमान फाटक स्थित बाल रूप हनुमान मंदिर में अगहन सुदी की अंतिम शनिवार को सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वाह किया गया।मंदिर प्रबंध की ओर से काशी खण्डोक्त श्री सुमंतेश्वर महादेव मंदिर में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित बाल स्वरूप हनुमान सहित राम दरबार का विधिवत शृंगार किया गया था।रागभोग अर्पित कर शाम से ही क्षेत्रीय महिलाएं भजन गा रही थीं।देर शाम श्री लाट भैरव भजन मंडल की ओर से श्रीरामचरितमानस के पंचम सोपान सुंदरकांड का सस्वर पाठ किया गया।देर रात्रि तक दर्शन पूजन का क्रम चलता रहा।आरती उतारी गयी।प्रसाद का वितरण किया गया।
मंदिर के महंत पंडित प्रमोद पाठक ने बताया कि मानस रचयिता तुलसी बाबा ने प्रथम काशी आगमन के दौरान सुमंतेश्वर महादेव मंदिर में रहते हुए मानस के अरण्यकांड, किष्किंधाकाण्ड और लगभग आधे सुंदरकांड की रचना की थीं।उन्होंने यहां अपने हाथों से बनी हुई हनुमान जी की प्रतिमा की स्थापना मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष के अंतिम शनिवार को किया था।तुलसी के कालखंड से लेकर तिथिनुसार व्यास सम्मलेन व शृंगार आदि होता रहा है।
इस अवसर पर पंडित दीपक पाठक, पंडित कमलेश दुबे, केवल कुशवाहा, गोविंद विश्वकर्मा, धमेंद्र शाह, आनंद मौर्य, उत्कर्ष कुशवाहा, यतीश जायसवाल, रुद्र अग्रहरि, हरि विट्ठल, अनुराग सोनकर, संतुष्ट, नरेंद्र प्रजापति, आदित्य, हिमेश, सुमित आदि शामिल रहे।

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी










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