वाराणसी, चिरईगांव
जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के तत्वाधान में जय गुरुबंदे आश्रम छितौना,जाल्हुपुर ,चिरईगांव में स्थापना दिवस के अवसर पर तीन दिवसीय सत्संग, भंडारा के पहले दिन दिनांक 14 नवम्बर को सत्संग का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के मीडिया प्रभारी शशि दास ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि परम संत स्वामी जय गुरुबंदे जी ने आए हुए आम जनमानस सत्संगीयो को सत्संग सुनाते हुए बतलाये कि मानव जब अपने परिवार के अलावा भी समाज में औरों के भलाई हेतु जनहित परहित का कार्य करता है तब इसके द्वारा पूर्ण कार्य, महान श्रेणी में आता है
जैसे दिनदुखीयो का सेवा एवं दबे कुचले लोगों को धन एवं वस्त्र देना, निआश्रित लोगों को आवास का व्यवस्था करना है किंतु यह सब महान कार्य करते हुए अभिमान से रहित होकर झुक कर अपने को कर्ता न मानकर जो सदैव लगा रहता है तो उसका कार्य उसके जीवन का महान कर्म बनता है तब कोई मानव संत महापुरुष के शरण में जाकर भजन, सिमरन, सेवा ,भक्ति ,प्रधान कर्म करता है तो उसके हृदय में परमात्मा सहज में प्रकट होकर खुद दिशा निर्देश देने लगते हैं।
परंतु बिना संतों के निज ज्ञान लिए कोई मनुष्य जल्दी महान एवं प्रधान कर्म करने के लिये अडिग नहीं होता है।
परम संत स्वामी जय गुरुबंदे जी राखी पुस्तक में कहते हैं कि-
संत कृपा से जो किया, मानव कर्म महान ।
देखा घट में जय गुरुबंदे, मिल जाते भगवान ।।
कर्म महान जिसने किया, दुनिया में इंसान।
भला उसी का जय गुरुबंदे , किए स्वयं भगवान ।।
रिपोर्ट – विजयलक्ष्मी तिवारी










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