🪔 दीपावली: रोशनी का त्योहार या आत्मा की जागृति का पर्व?
भारत में त्योहार केवल तिथियों से नहीं, भावनाओं से जिए जाते हैं। हर उत्सव अपने साथ कोई कहानी, कोई सीख लेकर आता है। दीपावली — जिसे “दीपो का उत्सव” कहा जाता है — ऐसी ही एक परंपरा है जो केवल रोशनी का नहीं, बल्कि अंधकार से चेतना की ओर यात्रा का प्रतीक है।
—🌟 क्यों मनाई जाती है दीपावली?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली उस दिन मनाई जाती है जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे।
लंका पर रावण-वध के पश्चात जब राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या पहुँचे, तो नगरवासियों ने दीपों से उनका स्वागत किया।
उस दिन अमावस्या की काली रात थी — और जब हर घर में दीप जले, तो मानो अंधकार स्वयं हार गया।
तभी से यह परंपरा चली आ रही है — कि दीपक केवल मिट्टी के नहीं, बल्कि सत् की विजय के प्रतीक हैं।
वहीं वैष्णव परंपरा में इसे भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी के मिलन का दिन भी माना गया है।
जैन धर्म में यह दिन भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है,
और सिख परंपरा में यह गुरु हरगोबिंद सिंह जी की रिहाई का पर्व है।
अर्थात् दीपावली केवल धार्मिक नहीं — आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बन चुकी है।—
🪔 कब और कैसे मनाई जाती है दीपावली?
दीपावली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो प्रायः अक्टूबर या नवंबर में आती है।
यह पाँच दिनों तक चलने वाला उत्सव है —
1️⃣ धनतेरस – धन और आरोग्य की कामना का दिन।
2️⃣ नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) – नकारात्मकता और आलस्य को त्यागने का प्रतीक।
3️⃣ मुख्य दीपावली (लक्ष्मी पूजा) – माँ लक्ष्मी और गणेश जी की आराधना का दिन।
4️⃣ गोवर्धन पूजा – भगवान कृष्ण के प्रति आस्था का प्रतीक।
5️⃣ भाई दूज – भाई-बहन के स्नेह का पर्व।
इन दिनों घरों की सफाई, रंगोली, दीप सजावट, मिठाइयाँ बाँटना और दान करना शुभ माना जाता है।
लक्ष्मी पूजा की रात, दीप जलाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके माँ लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
माना जाता है कि स्वच्छता और सच्चे मन से की गई पूजा से समृद्धि स्थायी होती है।
🌼 पौराणिकता से आधुनिकता तक
आज दीपावली की परंपराएँ बदल रही हैं — पहले मिट्टी के दीये जलते थे, अब बिजली की लड़ियाँ।
पहले लोग मिलकर मिठाइयाँ बाँटते थे, अब डिजिटल ग्रीटिंग्स भेजते हैं।
पर त्योहार का मूल संदेश अब भी वही है —
अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, और नफरत से प्रेम की ओर बढ़ना।
दीपावली हमें याद दिलाती है कि रोशनी सिर्फ दीवारों पर नहीं, दिलों में जगानी चाहिए।
अगर हर व्यक्ति एक दीप किसी और के जीवन में जलाए,
तो यह त्योहार सच में अर्थपूर्ण बन जाएगा।
✨ निष्कर्ष
दीपावली केवल धार्मिक परंपरा नहीं, यह भारत की संवेदना, आस्था और एकता का उत्सव है।
यह हमें सिखाती है कि हर अंधकार का अंत संभव है —
बस हमें अपने भीतर का दीप जलाना आना चाहिए।










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