वाराणसी शहर में 7 वर्षीय मासूम अनाया रिज़वान की रहस्यमय मौत ने पूरे चिकित्सा तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आंख की सर्जरी के लिए भर्ती की गई बच्ची की संदिग्ध हालात में मौत ने न केवल परिजनों को गहरे शोक में डाल दिया, बल्कि अस्पताल प्रशासन और सरकारी निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला ASG Eye Hospital और Matcare Maternity & Child Hospital, महमूरगंज से जुड़ा है। सर्जरी से पहले पूरी तरह स्वस्थ अनाया की मौत को अस्पताल प्रबंधन ने “कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर” बताया, लेकिन परिजन इसे चिकित्सकीय लापरवाही और एनेस्थीसिया की गड़बड़ी का परिणाम मान रहे हैं।
अनाया की माँ आफरीन बानो ने कहा
“हम अपनी बेटी के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे, दोषियों को सज़ा दिलाकर रहेंगे।” इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), मुख्यमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की माँग की है।उन्होंने दोनों अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज, एनेस्थीसिया रिकॉर्ड्स और मेडिकल फाइलों को जब्त करने का आग्रह किया है ताकि किसी भी तरह की साक्ष्य छेड़छाड़ रोकी जा सके।
अब बड़ा सवाल यह है —
क्या वाराणसी प्रशासन इस मासूम को न्याय दिलाने में ईमानदारी दिखाएगा? या यह मामला भी फाइलों और दबाव की राजनीति में दबकर रह जाएगा? अनाया की मौत अब केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि वाराणसी की स्वास्थ्य व्यवस्था की असली तस्वीर बन गई है — एक ऐसी तस्वीर, जो हर संवेदनशील नागरिक के मन को झकझोर रही है।










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