नई दिल्ली:
CM योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन का ऐतिहासिक फैसला लिया गया. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जानकारी दी कि नियमावली के नियम 22 के तहत नए प्रावधान नियम 22क, 22ख और 22ग जोड़े जाएंगे. यह निर्णय बुजुर्गों को दुर्व्यवहार से बचाने, उनके अधिकारों की सुरक्षा करने और सम्मानजनक जीवन देने के उद्देश्य से किया गया है. अब अगर संतान या आश्रित रिश्तेदार बुजुर्गों का भरण- पोषण नहीं करते, तो वे जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कराकर स्पष्ट लीगल कार्रवाई द्वारा अपनी संपत्ति से उन्हें बेदखल कर सकेंगे.
सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया को समयबद्ध किया है. पीड़ित बुजुर्ग अपनी शिकायत सीधे जिला मजिस्ट्रेट (DM) के समक्ष दर्ज करा सकेंगे. जिला मजिस्ट्रेट को इन शिकायतों पर 30 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी. इसके अलावा, जिला मजिस्ट्रेट को हर महीने ऐसे सभी मामलों और उन पर की गई कार्रवाई की एक मासिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी. जो बुजुर्ग खुद चलकर कार्यालय जाने और शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में नहीं हैं, उनके लिए सरकार जल्द ही एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी करेगी. इस हेल्पलाइन के जरिए असमर्थ बुजुर्गों को शिकायत दर्ज कराने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में मदद पहुंचाई जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि संपत्ति से बेदखली के इस नए नियम से बुजुर्गों पर होने वाले अत्याचारों में कमी आएगी और उन्हें सुरक्षा मिलेगी.











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