वाराणसी सारंग चौराहे से लक्ष्मी मन्दिर की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक सारंग तालाब इस वक्त नगर निगम की घोर लापरवाही का शिकार बन चुका है। तालाब को भरने वाले सीवर नाले के टूटने और उसकी मरम्मत न होने के कारण, नाले का सारा दूषित पानी एक पुरानी निकासी प्रणाली के माध्यम से तालाब के भीतर घुस गया है, जिससे महज दो महीने में ही यह जलस्रोत गंदे पानी से लबालब होकर बीमारियों का केंद्र बन गया है।
पुरानी व्यवस्था बनी नई आफत की जड़ स्थानीय निवासियों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस तालाब की एक पुरानी व्यवस्था थी
– पुराने समय से ही तालाब का एक ओवरफ्लो पाइप सीवर नाले से मिला हुआ था।
– जब तालाब बरसात के पानी से भर जाता था, तो यह पाइप अतिरिक्त पानी को नाले के जरिए बाहर निकालने का काम करता था।
– लेकिन अब यह निकासी व्यवस्था ही तालाब के लिए नई आफत बन गई है।
मुख्य सीवर का नाला बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। नाले का मलबा और गंदगी बाहर नहीं निकल पा रही है, जिससे सीवर का सारा पानी पीछे की ओर दबाव बनाकर, उसी पुराने ओवरफ्लो पाइप के रास्ते सीधा सारंग तालाब में जाने लगा है।
दो महीने में तालाब बना सीवर टैंक
इस विपरीत बहाव का नतीजा यह हुआ है कि पिछले दो महीनों में तालाब का स्वच्छ जल पूरी तरह से सीवर के गंदे पानी में बदल चुका है। तालाब पूरी तरीके से भर गया है और अब बदबू एवं गंदगी का विशालकाय गड्ढा बन चुका है।
इस दूषित जल जमाव से क्षेत्र में मच्छरों का भारी प्रकोप हो गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और हैजा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का जीवन दूभर हो गया है और वे बीमारी के डर से दहशत में हैं।










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