वाराणसी
सावन के पावन महीने में बाबा काशी विश्वनाथ की नगरी एक बार फिर अद्भुत आस्था की साक्षी बनी। आसमान से लगातार बरसती बारिश भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं रोक सकी। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से काशी की गलियां गूंज उठीं और बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
सुबह से ही काशी विश्वनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। हाथों में गंगाजल, कंधों पर कांवड़ और जुबां पर बाबा विश्वनाथ का नाम लिए शिवभक्त बारिश के बीच भी अपनी आस्था के पथ पर आगे बढ़ते रहे। कई श्रद्धालु बारिश में भीगते हुए बाबा के दरबार तक पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की।
बारिश की हर बूंद मानो शिवभक्तों की श्रद्धा को और मजबूत करती नजर आई। मौसम की चुनौती के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा—हर कोई बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए उत्साहित नजर आया।
काशी की गलियों से लेकर बाबा विश्वनाथ धाम तक चारों ओर ‘हर-हर महादेव’, ‘बोल बम’ और ‘जय बाबा विश्वनाथ’ के जयघोष गूंजते रहे। शिवभक्तों की भीड़ ने काशी के आध्यात्मिक वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।
कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की सेवा के लिए जगह-जगह लोगों ने प्रसाद, जल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की। सेवा भाव से जुटे लोगों ने बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इससे काशी की वह परंपरा एक बार फिर दिखाई दी, जिसमें अतिथि सेवा, भक्त सेवा और बाबा की भक्ति को सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।
श्रद्धालुओं का कहना था कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के सामने बारिश और मौसम की कठिनाइयां कोई मायने नहीं रखतीं। जिसके सिर पर बाबा विश्वनाथ का हाथ हो, उसके रास्ते की हर बाधा स्वयं दूर हो जाती है।
सावन के इस भक्तिमय माहौल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि काशी में आस्था मौसम की मोहताज नहीं होती। बारिश चाहे जितनी तेज हो, बाबा के भक्तों की भक्ति उससे कहीं अधिक प्रबल होती है।
बारिश बरसती रही, काशी की आस्था निखरती रही—बाबा विश्वनाथ की भक्ति में डूबा पूरा बनारस।










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