सऊदी अरब ने कथित तौर पर मिस्र को तुर्किये और पाकिस्तान के साथ बने नए ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ में शामिल करने का विरोध किया है, जबकि तुर्किये मिस्र को इस गठबंधन में शामिल करने के पक्ष में था।
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अधिकारियों को राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के नेतृत्व वाला मिस्र कम भरोसेमंद और आर्थिक मदद पर निर्भर साझेदार लगता है। इसके अलावा, मिस्र के UAE के साथ करीबी रणनीतिक रिश्ते भी रियाद की चिंता का कारण बताए जा रहे हैं।
हालांकि, मिस्र के लिए गठबंधन के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। भविष्य में काहिरा इसमें शामिल हो सकता है, लेकिन सऊदी अरब कथित तौर पर पहले मिस्र से ज्यादा विश्वसनीयता और रणनीतिक तालमेल चाहता है।
7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने मक्का में इस रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत एक सदस्य पर हमला होने की स्थिति में उसे सभी पर हमला माना जाएगा—इसे NATO के Article 5 जैसी व्यवस्था के तौर पर भी बताया गया है।











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