शहाबगंज
स्थानीय विकासखंड के सिहोरिया (सुबंथा) स्थित नूरी मस्जिद में शुक्रवार को जुमा की नमाज के दौरान तकरीर करते हुए मदरसा खलीलिया शाबिरिया गौसुल उलूम के प्रिंसिपल कारी अली अकबर ने मुसलमानों को अपने आचरण, व्यवहार और अमल पर आत्ममंथन करने की नसीहत दी।
उन्होंने कहा कि मुसलमान होना केवल नाम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके किरदार में ईमानदारी, अमानतदारी, बड़ों की इज्जत और छोटों से मोहब्बत नजर आनी चाहिए।
कारी अली अकबर ने कहा कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने छोटे-बड़े सभी के साथ अदब और सम्मान से पेश आने की शिक्षा दी है। बड़े छोटों पर रहम करें और छोटे बड़ों की इज्जत करें। उन्होंने कहा कि हमारे नबी ﷺ ने फरमाया है कि जो छोटों पर रहम नहीं करता और बड़ों की इज्जत नहीं करता, वह हम में से नहीं है।
तकरीर के दौरान उन्होंने एक मुस्लिम और ईसाई दोस्त की मिसाल सुनाई।
बताया कि दोनों के बीच बहुत गहरी दोस्ती थी और आपस में लेन-देन भी था। मुस्लिम युवक हज के लिए चला गया। वापस लौटने पर उसने अपने ईसाई दोस्त से हिसाब कर अपना हक वापस मांगा, लेकिन दोस्त ने देने से इनकार कर दिया।
कारी अली अकबर ने बताया कि मुस्लिम युवक पुलिस थाने जाने के बजाय एक पादरी के पास पहुंचा और पूरी बात बताई। पादरी ने एक कागज पर कुछ लिखकर उसे दिया और कहा कि इसे पढ़ना मत, बस अपने दोस्त को दे देना। मुस्लिम युवक ने वैसा ही किया। ईसाई दोस्त ने जब पर्ची पढ़ी तो उसका रवैया बदल गया।
उसने मुस्लिम युवक को बैठाया, चाय पिलाई, पूरा हिसाब किया और उसका हक वापस कर दिया। जब मुस्लिम युवक ने पूछा कि पर्ची में ऐसा क्या लिखा था, तो बताया गया कि उसमें लिखा था— “क्या तुम भी इस दौर के मुसलमान हो गए हो? अगर हो गए हो तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर नहीं हुए हो तो उसका हक वापस कर दो।
”कारी अली अकबर ने कहा कि यह बात आज के मुसलमानों को सोचने पर मजबूर करती है। कभी मुसलमान की पहचान उसकी सच्चाई, ईमानदारी और अमानतदारी से होती थी और लोग उस पर भरोसा करते थे। आज जरूरत है कि हर मुसलमान खुद से सवाल करे कि वह सिर्फ नाम से मुसलमान है या अपने किरदार और अमल से भी।
उन्होंने कहा कि इस्लाम की पहचान अच्छे व्यवहार, इंसाफ, ईमानदारी, अमानतदारी और इंसानियत से होती है। हम मुसलमान तो हैं, लेकिन हमें यह देखना होगा कि हम सिर्फ नाम के मुसलमान हैं या हमारे किरदार में भी इस्लाम दिखाई देता है।
इस अवसर पर नूरी मस्जिद के इमाम हाफिज नुरैन साहब, मौलाना कय्यूम साहब, हाजी इस्तेखार साहब, बहाउद्दीन, राजिक अहमद, रिजवान, अनीस सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
रिपोर्ट – मोहम्मद तस्लीम










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