जौनपुर
शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है। जिसका जवाब अब केवल अभियान चलाकर नहीं, बल्कि स्थायी व्यवस्था बनाकर देना होगा।
कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित कोतवाली चौराहा और हनुमान मंदिर के आसपास ई-रिक्शा चालकों की अव्यवस्थित आवाजाही राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनती जा रही है। सुबह कार्यालय और विद्यालय जाने के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। सड़क पर बेतरतीब खड़े ई-रिक्शा, ठेले और अन्य वाहनों के कारण जाम की स्थिति पैदा होती रहती है।
सबसे गंभीर सवाल यह है। कि कोतवाली थाना के ठीक बगल में यदि यातायात व्यवस्था इस तरह चरमराई हुई है। तो शहर के अन्य हिस्सों का क्या हाल होगा।
मीडिया की खबर के बाद अभियान, फिर कुछ दिनों में वही कहानी
जब मीडिया अपनी कलम के माध्यम से जिला प्रशासन और पुलिस को जमीनी हकीकत से अवगत कराता है। तो कई बार अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। कुछ दिनों तक व्यवस्था सुधरती दिखाई देती है। लेकिन उसके बाद फिर वही स्थिति लौट आती है।
जनता के बीच अब यह सवाल उठ रहा है। कि क्या यातायात व्यवस्था केवल चार दिन की कार्रवाई से सुधरेगी या इसके लिए स्थायी समाधान भी निकाला जाएगा।
कहीं ऐसा न हो कि कार्रवाई “चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात” वाली कहावत बनकर रह जाए।
हनुमान मंदिर के पास तीन ई-रिक्शा चालकों में कहासुनी से मचा हड़कंप
इसी बीच कोतवाली चौराहे पर हनुमान मंदिर के पास तीन ई-रिक्शा चालकों के बीच कहासुनी की स्थिति उत्पन्न हो गई। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। विवाद बढ़ने की आशंका को देखते हुए पिकेट पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और स्थिति को संभाल लिया।
पुलिस की सतर्कता से बड़ा विवाद टल गया और कुछ समय बाद स्थिति सामान्य हुई।
लेकिन इस घटना ने एक बार फिर कोतवाली चौराहे पर अव्यवस्थित ई-रिक्शा संचालन और यातायात नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मनमाना किराया वसूली से लेकर विवाद तक की शिकायतें
स्थानीय लोगों का कहना है। कि कुछ ई-रिक्शा चालकों द्वारा यात्रियों से किराये को लेकर मनमानी किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। कई बार किराये को लेकर कहासुनी इतनी बढ़ जाती है। कि विवाद और मारपीट जैसी नौबत तक पहुंच जाती है।
हालांकि ऐसी शिकायतों की सत्यता की जांच संबंधित विभाग द्वारा की जानी चाहिए, लेकिन यातायात व्यवस्था और किराया नियंत्रण को लेकर स्पष्ट एवं प्रभावी व्यवस्था की जरूरत अब महसूस की जा रही है।
ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद जाम क्यों
सबसे बड़ा सवाल यही है। कि जब प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिस की ड्यूटी रहती है। तो फिर ई-रिक्शा और ठेले सड़क किनारे अथवा चौराहे के आसपास इस तरह अव्यवस्थित क्यों दिखाई देते हैं।
सुबह के व्यस्त समय में आम नागरिकों को जाम से जूझना पड़ता है। स्कूली बच्चे, नौकरीपेशा लोग, बुजुर्ग और मरीज तक इस अव्यवस्था से प्रभावित होते हैं।
जनता पूछ रही है। अब स्थायी समाधान कब
जनता की मांग है। कि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से कोतवाली चौराहा सहित शहर के प्रमुख स्थानों पर
ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड और रूट तय करें।
चौराहों पर ई-रिक्शा खड़ा करने पर प्रभावी रोक लगाई जाए। ठेले और अस्थायी दुकानों के लिए निर्धारित स्थान तय किए जाएं।
मनमाना किराया वसूलने की शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
सुबह और शाम के व्यस्त समय में यातायात पुलिस की प्रभावी तैनाती हो।
बार-बार अभियान चलाने के बजाय स्थायी यातायात व्यवस्था लागू की जाए।
नियम तोड़ने वालों पर बिना भेदभाव के कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब सवाल कार्रवाई का नहीं, निरंतरता का है।
जौनपुर की जनता को अभियान नहीं, व्यवस्था चाहिए।
जाम से राहत चाहिए।
मनमानी से निजात चाहिए।
और सबसे बढ़कर ऐसी यातायात व्यवस्था चाहिए, जिसमें आम नागरिक सड़क पर सुरक्षित और सम्मानपूर्वक आवागमन कर सके।
जिला प्रशासन से जनता का सीधा सवाल है। क्या कोतवाली चौराहे की यह अव्यवस्था अब स्थायी रूप से खत्म होगी। या फिर कुछ दिनों की कार्रवाई के बाद दोबारा वही “चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात” का सिलसिला चलता रहेगा।
अब वक्त है। कि प्रशासन अभियान नहीं, ऐसा स्थायी समाधान दे जिसकी तस्वीर सड़क पर दिखाई दे और जिसका लाभ सीधे जौनपुर की जनता को मिले।










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