चन्दौली सकलडीहा
चतुर्भुजपुर कस्बा में सैकड़ों वर्ष पुरानी स्वंय भू कालेश्वर महादेव की प्राचीन मंदिर है। बनारस स्टेट के सेनापति रहे बाबू बखत सिंह ने सैकड़ों वर्ष पूर्व भगवान स्वंय भू की स्वप्न में दर्शन के बाद मंदिर का निर्माण कराया था।
ब्रिटिश अधिकारी रॉबिन विक्टर एग्जलेंडर स्टॉक असिस्टेंट सुपरीटेंडेंड मंदिर की दहलीज छोटा कर प्लेट फार्म का विस्तार करना चाहता था। लोगों का मानना है कि कालेश्वर महादेव की प्रकोप के कारण ब्रिटिस अधिकारी की विशेष सैलून पलटने से अधिकारी की मौत होगयी । आज भी लोगों का आस्था है कि स्वंय भू की दर्शन से अकाल मृत्यु भी टल जाती है।
वर्ष 18 सौ के करीब राजस्थान के अलवर जिला से राजपूताना काफिला सकलडीहा कोट में रूका था। बनारस स्टेट के यहां बाबू बखत सिंह सेनापति हुआ करते थे। एक दिन स्वप्न में स्वंय भू कालेश्वर महादेव का दर्शन होने के बाद चतुर्भुजपुर बरठी गांव के समीप मंदिर का खुदाई का शुरू हुआ। जहां भगवान भेालेशंकर की स्वंय भू शिव लिंग दिखाई पड़ा। इसके बाद सेनापति बाबू बखत सिंह द्वारा मंदिर का निर्माण शुरू कराया गया।
आस्था है कि स्वंय भू की दर्शन मात्र से अकाल मृत्यु भी टल जाती है। लेकिन ब्रिटिश अधिकारी रॉबिन विक्टर एग्जलेंडर स्टॉक असिस्टेंट सुपरीटेंडेंड रेल पथ इंजिनियर को पता नही था। प्लेट फार्म की विस्तारर के लिये मंदिर की दहलीज तोड़कर चौड़ा करने के लिये निरीक्षण के लिये विशेष सैलून से आ रहा था। लोगों का मानना है कि स्वंय भू की प्रकोप के कारण विशेष सैलून मंदिर से कुछ दूर पहले पलट जाने से 4 अगस्त 1928 अधिकारी की मौत होगयी।
ब्रिटिश अधिकारी की पत्नी पति की मौत के बाद अधिकारी की यादगार में शिलापट्ट लगाकर प्लेटफॉर्म का विस्तार कार्य बंद कर कर लौट गई मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी पियूष तिवारी ने बताया कि स्वयं भू की दर्शन पूजन मात्र से हर दुःखो का नाश हो जाता है।










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