वाराणसी
धर्म, अध्यात्म और आस्था की नगरी काशी में आज एक गंभीर सवाल के कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। जिन गलियों से “हर-हर महादेव” का उद्घोष सुनाई देना चाहिए, वहां जुआ, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के कथित संचालन को लेकर उठ रहे सवाल कानून-व्यवस्था की कार्यशैली पर चिंता पैदा कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में समय-समय पर यह आरोप सामने आते रहे हैं। कि शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में अवैध कारोबार फल-फूल रहे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है। तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था की प्रभावशीलता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। किसी भी अवैध गतिविधि को संरक्षण देने का आरोप अत्यंत गंभीर विषय है। जिसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है। कि कुछ क्षेत्रों में जुए के कथित अड्डों के संचालन में बिचौलियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है। ऐसे मामलों में तथ्यों के आधार पर जांच और कानूनी कार्रवाई ही सच्चाई को सामने ला सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है। कि यदि स्थानीय स्तर पर अवैध गतिविधियों की जानकारी जनता तक पहुंच रही है। तो क्या उनकी रोकथाम के लिए पर्याप्त और समयबद्ध कार्रवाई की जा रही है। यदि नहीं, तो इसका कारण क्या है। कानून का भय अपराधियों में दिखाई क्यों नहीं देता।
हाल ही में तीन लोगों को हिरासत में लेने और कुछ वाहनों के बरामद होने की खबरों ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। लेकिन जनता आज भी यह जानना चाहती है। कि जिन क्षेत्रों—सिगरा, चेतगंज, मुकीमगंज, रोहनिया और नरोत्तमपुर—में अवैध गतिविधियों के कथित संचालन की चर्चाएं होती रही हैं। वहां यदि कोई गैरकानूनी कार्य हो रहा है। तो उसके विरुद्ध व्यापक और निष्पक्ष कार्रवाई कब होगी
क्या अपराधियों के हौसले कानून से बड़े हो चुके हैं।
क्या अवैध कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई केवल शिकायतों तक सीमित रह जाएगी।
क्या काशी की पवित्र पहचान को अपराध के साए से मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
यदि किसी स्तर पर पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के आरोप सामने आते हैं। तो क्या उनके विरुद्ध निष्पक्ष विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वाराणसी की जनता को पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा है। कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को कानून से ऊपर न माना जाए। यदि कहीं भी अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं। तो उनके विरुद्ध कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, किसी भी आरोप की सत्यता की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही की जानी चाहिए।
जब कानून जागता है। तो अपराध के साम्राज्य ढह जाते हैं। और जब जनता सवाल पूछती है। तो व्यवस्था को जवाब देना ही पड़ता है। काशी की गरिमा तभी सुरक्षित रहेगी, जब कानून का राज हर गली, हर चौक और हर थाने तक समान रूप से दिखाई देगा।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला










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