मीरजापुर
भारतीय किसान यूनियन ने देश के किसानों, कृषि मजदूरों एवं ग्रामीण भारत से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित 15 सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी मिर्जापुर के माध्यम से प्रेषित किया।
ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय किसान यूनियन विगत चार दशकों से किसानों और ग्रामीण समाज के अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष करती आ रही है। वर्तमान में खेती की लागत में लगातार वृद्धि, लाभकारी मूल्य न मिलना, गन्ना भुगतान लंबित होना, उर्वरकों की अनुपलब्धता और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान गंभीर संकट से गुजर रहा है। बाढ़, अतिवृष्टि, सूखा, भूस्खलन और ओलावृष्टि ने किसानों की आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है।
संगठन ने भारत- अमेरिका व्यापार समझौते सहित विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को बिना पर्याप्त सुरक्षा के विदेशी कॉरपोरेट प्रतिस्पर्धा के लिए खोल दिया गया तो करोड़ों छोटे एवं सीमांत किसानों, दुग्ध उत्पादकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा दुष्प्रभाव पड़ेगा। साथ ही 9 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा को दिए गए लिखित आश्वासनों का पूर्ण क्रियान्वयन न होने पर भी निराशा व्यक्त की गई।
भारतीय किसान यूनियन की प्रमुख 15 मांगों में प्रमुख रूप से
1. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश C2+50 प्रतिशत के अनुसार सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद कानून बनाया जाए।
2. गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य देशभर में न्यूनतम 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए और लंबित भुगतान ब्याज सहित कराया जाए।
3. किसानों एवं कृषि मजदूरों की संपूर्ण ऋण माफी और ब्याज मुक्त कृषि ऋण दिया जाए।
4. कृषि के लिए निःशुल्क बिजली तथा ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट निःशुल्क बिजली, बिजली बिल 2025, स्मार्ट मीटर और निजीकरण प्रक्रिया वापस ली जाए।
5. किसानों के हितों के विरुद्ध चारों श्रम संहिताएं, बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति और राष्ट्रीय सहकारिता नीति वापस ली जाए।
6. मनरेगा में 200 दिन रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित की जाए।
7. डीएपी, यूरिया सहित उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता, सब्सिडी बहाली और कालाबाजारी पर रोक लगे।
8. बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि आदि को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर प्रभावित किसानों, बंटाईदारों और मजदूरों को उचित मुआवजा दिया जाए।
9. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा कर सार्वजनिक क्षेत्र आधारित पारदर्शी फसल एवं पशुधन बीमा लागू किया जाए।
10. बिना पुनर्वास के भूमि अधिग्रहण, बेदखली और बुलडोजर कार्रवाई न हो तथा भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का पालन हो।
11. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित किसी भी ऐसे मुक्त व्यापार समझौते को स्वीकार न किया जाए जिससे भारतीय कृषि और डेयरी प्रभावित हो।
12. डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात पर रोक लगाई जाए।
13. बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीज क्षेत्र में एकाधिकार पर रोक और पारंपरिक बीज अधिकारों की रक्षा की जाए।
14. कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का विस्तार कर ग्रामीण युवाओं को रोजगार दिया जाए। 15. प्राकृतिक संसाधन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किया जाए।
ज्ञापन में अंत में कहा गया है कि कृषि केवल आजीविका नहीं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता की आधारशिला है। समय रहते समाधान न होने पर इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।










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