शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गुरुवार को एटा में कहा- ‘राम मंदिर में शिला पूजन के समय से ही चोरी हो रही है। कितने आरोप लग चुके हैं। जब मंदिर बनने लगा तो प्लॉट बिकने लगे। दो-दो मिनट में प्लॉट करोड़ के हो जाते थे। वहां पहले से ही चंपत राय बैठे हैं। चंपत का मतलब ही होता है लेकर भाग जाना।’ चंपत राय मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री हैं।
इधर, खुद को मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह ने मीडिया से कहा- मंदिर में चोरी कोई नई बात नहीं थी, यह रोजाना होती थी। मैंने खुद चोरी पकड़ी थी। इसकी शिकायत चंपत राय और गोपाल जी से की थी।
अगले ही दिन चंपत राय ने मुझे हटा दिया। मंदिर में लगे CCTV कैमरों की 8 महीने पुरानी फुटेज डिलीट करवा दी गई। चंपत राय मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में मनमर्जी चलाते हैं। अगर कोई विरोध करता है, तो उसे हटा दिया जाता है।
खुद को मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह ने कहा- जब मैं मंदिर में तैनात था, तब चढ़ावे में आने वाले सोने-चांदी के आभूषणों और बर्तनों का कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं था










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