नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर देवी महागौरी की पूजा करें। देवी का ये स्वरूप गौर वर्ण हैं यानी महागौरी बहुत गोरी हैं। महागौरी सफेद वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए इनकी पूजा में सफेद कपड़े पहनने चाहिए। इनकी पूजा करने से भक्त के नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।
देवी महागौरी की कथा
देवी पर्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया था। इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। दिन-रात, वर्षा, धूप और ठंड, हर परिस्थिति में देवी ने तप किया। देवी ने केवल फूल और बिल्वपत्र खाए और उपवास भी रखा। उनका एकमात्र उद्देश्य था भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना। दिन-ब-दिन तपस्या कठिन होती गई, लेकिन शिवजी प्रकट नहीं हुए। तब पार्वती ने अपने आहार को और भी कड़ा कर दिया। फल, पत्तियां और जल तक त्याग दिया। उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी। शरीर काला पड़ गया था, अत्यधिक दुर्बलता ने उन्हें घेर लिया था, लेकिन उनका संकल्प मजबूत था।
देवी की कठोर तपस्या और अटूट श्रद्धा को देखकर भगवान शिव अंततः प्रसन्न हुए। वे पार्वती के समक्ष प्रकट हुए और उन्हें पत्नी रूप में अपनाने का वरदान दिया और इसके बाद भगवान ने पार्वती के शरीर पर गंगाजल छिड़का था। भगवान के आशीर्वाद और गंगाजल के स्पर्श से पार्वती का काला शरीर एकदम गोरा हो गया और उनकी कमजोरी दूर हो गई। इस घटना के बाद देवी पार्वती को महागौरी के नाम से जाना जाने लगा।
कहानी की सीख
“ये कहानी हमें संदेश देती है कि जीवन में जब हम अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ता से बढ़ते हैं, तब चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, हमें रुकना नहीं चाहिए। पार्वती की तपस्या विश्वास और धैर्य का प्रतीक है। अंत में जब वे सफल हुईं, तो उनके सारे दुख दर्द दूर हो गए, उन्हें एक नई ऊर्जा मिली, देवी का संकल्प पूरा हुआ और भगवान शिव पति रूप में प्राप्त हुए। हमें भी जीवन में असफलता मिलने पर हार नहीं माननी चाहिए। बार-बार प्रयास करना चाहिए, तभी सफलता मिलती है।
रिपोर्ट जगदीश शुक्ला










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