जौनपुर
जिले के बहुचर्चित दुल्हा हत्याकांड में खेतासराय पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस की कहानी जितनी सनसनीखेज दिखाई दे रही है। उतने ही गंभीर सवाल उसकी कार्यशैली और कार्रवाई पर खड़े हो रहे हैं। जिलेभर में चर्चा है। कि आखिर भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद तीनों नामजद आरोपी पुलिस को चकमा देकर कैसे फरार हो गए। और यदि पुलिस को पहले से इतनी सटीक सूचना थी तो फिर गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी।
3 मई को सुबह थानाध्यक्ष खेतासराय द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, दुल्हा हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रदीप विंद , रवि यादव और भोले राजभर सोगर गांव के कब्रिस्तान में अपने शरणदाताओं के साथ छिपे हुए थे। पुलिस का दावा है। कि मुखबिर की सूचना पर खेतासराय पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की और दबिश दी। लेकिन जैसे ही पुलिस आगे बढ़ी, आरोपियों ने फायरिंग शुरू कर दी और रात का फायदा उठाकर भाग निकले। पुलिस मौके से आठ लोगों रंजीत बिंद, आदित्य, कमलेश यादव, गुलशन राजभर,शाहिल सचिन ,शोले राजभर और बृज मोहन को गिरफ्तार करने का दावा कर रही है। जिन्हें आरोपियों का मददगार बताया गया है।
एफआईआर में दर्ज घटनाक्रम को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है। कि यदि आरोपियों के साथ उनके शरणदाता मौजूद थे और पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया, तो फिर मुख्य आरोपी पुलिस के घेरे को तोड़कर कैसे निकल गए। क्या पुलिस के पास पर्याप्त बल नहीं था। क्या दबिश की रणनीति कमजोर थी। या फिर कहीं न कहीं लापरवाही हुई।
यहीं से पुलिस की पूरी कहानी पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। स्थानीय लोगों और कानूनी जानकारों के बीच चर्चा है। कि यदि पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी की थी तो आखिर मुख्य आरोपी भाग कैसे निकले। क्या पुलिस की घेराबंदी सिर्फ कागजों तक सीमित थी। यदि आरोपियों ने वास्तव में पुलिस पर फायरिंग की तो पुलिस ने जवाबी कार्रवाई क्यों नहीं की ।उन्हें रोकने की ठोस कोशिश क्यों नहीं की।
कई लोग इसे पुलिस की बड़ी नाकामी मान रहे हैं। क्योंकि जिस मामले ने पूरे जिले को झकझोर दिया हो, जिसमें दूल्हे की बारात के दौरान हत्या हुई हो, उस केस के मुख्य आरोपियों का पुलिस के सामने से फरार हो जाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चर्चाएं इस बात की भी हो रही हैं। कि क्या पुलिस अपनी विफलता को छिपाने के लिए अब “कब्रिस्तान कनेक्शन” और “फायरिंग” जैसी कहानी के जरिए कार्रवाई को बड़ा दिखाने की कोशिश कर रही है।
गौरतलब है। कि एक मई 2026 को खेतासराय थाना क्षेत्र में बारात लेकर जा रहे दूल्हे आजाद बिंद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी। पुलिस पर तत्काल खुलासे और गिरफ्तारी का दबाव था। इसी बीच पुलिस ने एक लाख के इनामी रवि यादव को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया, लेकिन अब भी कई मुख्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
अब सवाल सिर्फ आरोपियों की तलाश का नहीं रह गया है। बल्कि पुलिस की कार्रवाई की विश्वसनीयता भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। जिले में लोग पूछ रहे हैं। कि आखिर सच क्या है। क्या वास्तव में आरोपी पुलिस पर फायरिंग कर भाग निकले या फिर पूरी कहानी में कुछ ऐसा है। जिसे पुलिस सार्वजनिक नहीं करना चाहती।
फिलहाल दुल्हा हत्याकांड की यह एफआईआर कानून से ज्यादा चर्चा और संदेह का विषय बन चुकी है। आने वाले दिनों में पुलिस की अगली कार्रवाई और जांच ही तय करेगी कि यह कहानी पूरी तरह सच है। या फिर इसमें कई अनसुलझे सवाल अभी बाकी हैं।









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