चन्दौली सैयद राजा
स्थानीय नगर पंचायत सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गुरूवार को ईद उल अजहा (बकरीद) का पर्व अकीदत के साथ मनाया गया। मस्जिदों और ईदगाहों में अलग-अलग समय पर नमाज़ अदा की गयी। पुराने ईदगाह में 7-15 बजे ताजुशरिया जामा मस्जिद में 7-30 बजे पुरानी टंकी ईदगाह में 6-45 बजे नमाज अदा की गई।
मुस्लिम बंधुओं ने एक दूसरे से गले मिलकर ईद की बधाइयां दी। नमाज के दौरान देश में अमन चैन की दुआएं की गई इसके बाद लोगों ने अपने घरों में जाकर कुर्बानी की रस्म अदा की। ईदगाह व मस्जिदों के पास भारी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात रहे। पुराने ईदगाह के पास सीओ एवं थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
पुराने ईदगाह में नमाज से पूर्व मौलाना शाबिर मरकजी ने कहा कि पैगंबर हजरत इब्राहिम की ओर से अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी अल्लाह की राह में दी थी। कुर्बानी के समय अल्लाह ने हजरत इस्माइल के स्थान पर दुम्बा रख दिया था।
इससे हजरत इस्माइल की जगह उस दुम्बे की कुर्बानी दी गई। इसके बाद पैगंबर मोहम्मद साहब ने कुर्बानी का यह सिलसिला जारी रखा इसलिए बकरीद के दिन बीरेंदर या दुम्बा की कुर्बानी की मान्यता है। यह त्यौहार त्याग बलिदान और इंसानियत का संदेश भी देता है।
उन्होंने कहा कि बकरे की कुर्बानी में तीन हिस्से किए जाते हैं ।एक हिस्सा गरीबों के लिए व एक हिस्सा अपने रिश्तेदारों में व एक हिस्सा घर के लिए होता है ।यह कुर्बानी का सिलसिला अगले तीन दिन तक चलता रहेगा।










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