हाईकोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, विनीत सिंह समेत बाहुबलियों के लाइसेंसों की जांच के आदेश दिए हैं।

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हाईकोर्ट ने उन बाहुबलियों की आपराधिक कुंडली तलब की है जिनके नाम सरकारी हलफनामों से गायब हैं। हाईकोर्ट ने बाहुबली को मिली सरकारी सुरक्षा का ब्यौरा 26 मई तक मांगा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संत कबीर नगर के रहने जयशंकर की याचिका पर दी है। इससे पहले गन कल्चर से चिंतित कोर्ट ने प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस के आवंटन, नवीनीकरण और नियमों की अनदेखी को लेकर मंडलवार जारी शस्त्र लाइसेंस की जानकारी मांगी थी। इसके क्रम में जो जानकारी अपर मुख्य सचिव (गृह) और संयुक्त सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे में दी गई, उस आंकड़े से कोर्ट हैरान है।

हलफनामे में बताया गया कि प्रदेश में मौजूदा समय में 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। अलग-अलग श्रेणियों में 23,407 आवेदन अभी भी लंबित हैं। 6,062 ऐसे मामले हैं, जहां दो या दो से अधिक आपराधिक मुकदमों वाले व्यक्तियों को शस्त्र लाइसेंस दिए गए हैं। साथ ही प्रदेश के 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं। पुलिस प्रमुखों और डीएम के आदेशों के खिलाफ 1,738 अपीलें कमिश्नरों के पास लंबित हैं।

अधिकारियों की ओर से पेश हलफनामे से कोर्ट अभी भी असंतुष्ट है। कोर्ट ने पाया कि अपर मुख्य सचिव (गृह) और संयुक्त सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे में जो आंकड़े सामने आए, वे चौकाने वाले हैं।

स्थानीय पुलिस प्रशासन कई बार राजनीतिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली लोगों की जानकारी छिपा लेता है। इसलिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने जोन वार अपराधियों के साथ-साथ कई राजनेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंसों की भी जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि इन्हें किस श्रेणी की सुरक्षा मिली है, कितने पुलिसकर्मी तैनात हैं और इनके पास कितने असलहे हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है। कहा है कि सभी जिलों के कप्तान और पुलिस कमिश्नर जानकारी पेश करते समय यह लिखित अंडरटेकिंग देंगे कि कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई है। यदि कोई तथ्य छिपाया गया तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। इस कर्तव्य के प्रति जान बूझकर की गई लापरवाही माना जाएगा।

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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