कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं जागी इलियां पुलिस गोलीकांड, धमकी, साक्ष्यों से खिलवाड़ और पुलिस की चुप्पी ने खड़े किए बड़े सवाल

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चंदौली

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां प्रदेश में “जीरो टॉलरेंस” और कानून के राज की बात करते हैं। वहीं जनपद चंदौली के थाना इलियां क्षेत्र से सामने आया एक गंभीर मामला पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

पीड़ित मंगल मौर्य पुत्र दुख्खीं मौर्य का आरोप है। कि 28 जून 2026 की रात लगभग 12:30 बजे वह घर से शौच के लिए निकले थे और अपने सिंचाई वाले नलकूप की टंकी से पानी भर रहे थे। तभी पहले से घात लगाए बैठे रिंकू तिवारी एवं गोविंद हरिजन ने केले के पेड़ की आड़ से 12 बोर के कट्टे से उन पर जानलेवा फायर कर दिया।

पीड़ित का दावा है। कि पानी की सतह नीचे होने के कारण वह झुक गए और बाल-बाल बच गए, अन्यथा उस रात एक गरीब परिवार उजड़ सकता था।

परिवार का कहना है। कि घटना के बाद भागते हुए आरोपियों को मंगल मौर्य की पत्नी, बेटे और आसपास के कुछ लोगों ने देखा और पहचाना। पीड़ित पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि घटना से पहले सुरेंद्र दत्त और समीर तिवारी द्वारा धमकी दी गई थी।
ज्यादा नेतागिरी करोगे तो 10 लाठी मारकर जेल भेज देंगे

मंगल मौर्य ने तत्काल इलियां थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है। कि पुलिस ने पीड़ित को ही अर्दब में लेकर धमकाना शुरू कर दिया।

पीड़ित परिवार के अनुसार, मौके पर पहुंचे कस्बा चौकी प्रभारी ने न तो घटनास्थल का वैज्ञानिक निरीक्षण किया, न फॉरेंसिक टीम बुलाई और न ही साक्ष्य सुरक्षित किए। उल्टा अमरूद के पेड़ के नीचे कुर्सी मंगाकर बैठ गए और पीड़ित को धमकाते हुए कहा कि
ज्यादा नेतागिरी करोगे तो 10 लाठी मारेंगे और जेल भेज देंगे।

यह कथित बयान अब पूरे इलाके में चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है।

मौके पर आज भी पड़ा है। गोली का खोखा और छर्रा

सबसे बड़ा सवाल यह है। कि जब घटनास्थल पर आज भी गोली का खोखा और छर्रा पड़े होने की बात कही जा रही है। तो आखिर पुलिस ने अब तक फॉरेंसिक जांच क्यों नहीं कराई

पीड़ित मंगल मौर्य का कहना है। कि उन्होंने जानबूझकर गोली के खोखे और छर्रे को नहीं हटाया ताकि वैज्ञानिक जांच में सच्चाई सामने आ सके। परिवार ने मीडिया के माध्यम से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई है। ताकि भविष्य में कोई साक्ष्य मिटाया न जा सके।

उल्टे चोर कोतवाल को डांटे” वाली कहावत हुई सच

ग्रामीणों का आरोप है। कि इलियां पुलिस बिना निष्पक्ष जांच किए पूरे मामले को दबाने में जुटी हुई है।

पीड़ित पक्ष का कहना है। जहां पुलिस की फाइल बंद होती है। वहीं से मीडिया और समाज की जांच शुरू होती है। लोग सवाल उठा रहे हैं। कि आखिर किसके दबाव में पुलिस ने न मुकदमा दर्ज करने में गंभीरता दिखाई और न ही घटनास्थल का सही मुआयना किया।

घरौनी के पिलर तोड़े गए, बांस काटे गए… फिर भी कार्रवाई नहीं

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि संग्राम सेनानी विद्यासागर की घरौनी के पिलर तोड़े गए और 7 पीस बांस काटे गए, लेकिन पुलिस ने इस मामले में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

ग्रामीणों का कहना है। कि यदि यही घटना किसी रसूखदार व्यक्ति के साथ हुई होती, तो अब तक कई टीमें जांच में लग चुकी होतीं।

झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश का आरोप

मंगल मौर्य ने गांव के ही रिंकू तिवारी उर्फ राकेश तिवारी पर पूर्व में झूठी शिकायत देकर उन्हें फंसाने की कोशिश का आरोप लगाया है। अब पीड़ित परिवार को डर सता रहा है। कि कहीं पुलिस साजिशन उन्हीं के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज न कर दे।

इस पूरे घटनाक्रम ने गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

गरीब परिवार न्याय की गुहार में, उठीं बड़ी मांगें

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है। कि

घटनास्थल की तत्काल फॉरेंसिक जांच कराई जाए

गोली के खोखे और छर्रे को वैज्ञानिक परीक्षण में लिया जाए

पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए

आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष मुकदमा दर्ज हो

पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

अब सबसे बड़ा सवाल…

क्या चंदौली पुलिस मुख्यमंत्री के “जीरो टॉलरेंस” अभियान को जमीन पर लागू करेगी
या फिर गरीब परिवार की आवाज सत्ता और सिस्टम के गलियारों में दबा दी जाएगी ।

यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा जनआक्रोश बन सकता है। क्योंकि अब सवाल सिर्फ मंगल मौर्य के परिवार का नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और जनता के भरोसे का है।

 

रिपोर्टर  :  जगदीश शुक्ला

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