चन्दौली चकिया
सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। चकिया विकास खंड के कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय, भटवारा खुर्द में शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते नौनिहालों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
विद्यालय की स्थिति बेहद
चिंताजनक बताई जा रही है। यहां तीन शिक्षकों की नियुक्ति है, जिनमें दो महिला शिक्षक और एक प्रधानाध्यापक ज्ञानेंद्र सिंह शामिल हैं। आरोप है कि विद्यालय में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति नहीं होती और कक्षाओं का संचालन भी ठीक से नहीं किया जाता। कुछ शिक्षक समय से विद्यालय नहीं पहुंचते, तो कुछ कक्षा में जाने से कतराते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा शिक्षा सुधार के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार शिक्षकों की लापरवाही से यह प्रयास विफल होते नजर आ रहे हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिख रहा है।
अभिभावकों का दर्द छलका
विद्यालय में पढ़ने वाले एक छात्रा के अभिभावक रामलाल ने बताया, “हम अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में इसलिए भेजते हैं कि यहां मुफ्त में अच्छी शिक्षा मिलेगी, लेकिन यहां तो पढ़ाई ही नहीं होती। शिक्षक समय से आते नहीं हैं, तो बच्चों का क्या होगा?”
एक अन्य अभिभावक सीमा देवी ने कहा, “बच्चे घर आकर बताते हैं कि स्कूल में पढ़ाई कम और समय ज्यादा बर्बाद होता है। मजबूरी में अब हम निजी स्कूल में दाखिला कराने की सोच रहे हैं।”
छात्राओं ने भी बताई सच्चाई
विद्यालय की एक छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “मैडम कभी-कभी ही पढ़ाती हैं और सर तो अक्सर स्कूल में नहीं दिखते। कई दिन तो ऐसे ही निकल जाते हैं।”
जिम्मेदारी से भागते शिक्षक
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक जैनेंद्र सिंह की भूमिका भी संदिग्ध है। उनका कहना है कि विद्यालय में अनुशासन और पढ़ाई का माहौल बनाने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की होती है, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत है।
सरकार की मंशा पर पानी
प्रदेश सरकार जहां ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ के नारे के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है, वहीं इस तरह की लापरवाही सरकार की मंशा पर पानी फेर रही है। यही वजह है कि सरकारी विद्यालयों से लोगों का विश्वास उठता जा रहा है और अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने को मजबूर हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि विद्यालय की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए और लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में सरकारी विद्यालयों की स्थिति और भी खराब हो सकती है, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकार में चला जाएगा।
रिपोर्ट – अलीम हाशमी










Users Today : 65
Users This Year : 12583
Total Users : 25176
Views Today : 183
Total views : 49843