सविनय निवेदन है कि मैं आपके संज्ञान में एक अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक विषय लाना चाहता हूँ, जो विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर के संचालन से संबंधित है तथा जिसके परिणामस्वरूप एक मरीज की मृत्यु है। उपलब्ध तथ्यों एवं समाचार रिपोटों से यह स्पष्ट रूप से स्थापित होता है कि यह घटना किसी साधारण मानवीय त्रुटि का परिणाम नहीं, बल्कि संस्थागत, प्रशासनिक एवं पर्यवेक्षीय लापरवाही का प्रत्यक्ष परिणाम है। प्रकाशित समाचारों के अनुसार 71 वर्षीय राधिका देवी की दिनांक 27.04.2026 को गलत सर्जरी के परिणामस्वरूप मृत्यु हो गई,
जिसके मूल में मरीज की पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का पूर्णतः विफल होना पाया गया। यह तथ्य भी सामने आया कि ऑपरेशन थिएटर में ले जाते समय न तो उन्हें पहचान के लिए आर्म बैंड लगाया गया और न ही किसी प्रकार की मानक प्री-ऑपरेटिव सत्यापन प्रक्रिया का पालन किया गया, जो अत्यंत गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इस प्रकार ऑपरेशन थिएटर वैसे संवेदनशील क्षेत्र में मूलभूत सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न होना स्वयं में एक गंभीर लापरवाही है, जो सीधे-सीध जीवन के अधिकार से संबंधित है।
इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण और चिंताजनक तथ्य यह भी सामने आया है कि पूर्व में ट्रामा सेंटर में मरीजों की पहचान सुनिश्चित करने हेतु प्री-ऑपरेटिव कक्षों की व्यवस्था थी, जहाँ ऑपरेशन से पहले मरीजो का सत्यापन किया जाता था। किंतु प्रशासनिक निर्णय के तहत इन प्री-ऑपरेटिव कक्षों को समाप्त कर दिया गया और वर्तमान में मरीजों को बिना किसी व्यवस्थित पहचान प्रक्रिया के सीधे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जा रहा है।

इसी कारण इस प्रकरण में जिस मरीज की सर्जरी न्यूरो (मस्तिष्क) की होनी थी, उसे ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। साथ ही, मरीजों के नाम में समानता (आधार कार्ड के अनुसार) के कारण पहचान में भ्रम उत्पन्न हुआ, जो पूर्व में विद्यमान प्री-ऑपरेटिव व्यवस्था होने पर संभवतः टाला जा सकता था। स्वयं चिकित्सकों द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि प्री-ऑपरेटिव कक्षों के समाप्त होने से ऐसी त्रुटियों की संभावना बढ़ गई है।
उपरोक्त तथ्यों से यह निर्विवाद रूप से स्पष्ट है कि यह पटना आकस्मिक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित प्रशासनिक परिवर्तन के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप उत्पन्न हुई है, जिसमें एक स्थापित सुरक्षा तंत्र को समाए कर दिया गया, परंतु उसके स्थान पर कोई वैकल्पिक एवं प्रभावी व्यवस्था लागू नहीं की गई यह स्थिति पोर प्रशासनिक लापरवाही, मरीजों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता तथा एक पूर्वानुमेय जोखिम को उत्पन्न करने का द्योतक है।
दिनांक 24.03.2022 को तत्कालीन कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा जारी अधिसूचना (संदर्भ संख्या: R/GAD/Misc/145/1620, पत्र मेलम्म) के अनुसार ट्रामा सेंटर परिसर में स्थित समस्त इकाइयों को प्रोफेसर इंचार्ज के प्रशासनिक नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के अंतर्गत रखा गया है तथा उन्हें संबंधित इकाइयों के लिए विधानाध्यक्ष के समस्त अधिकार प्रदान किए गए हैं।
उक्त अधिसूचना कर्तमान में भी पूर्ण रूप से प्रभावी एवं लागू है, जिससे ट्रामा सेंटर के प्रशासनिक, सुरक्षा एवं संचालन संबंधी सभी निर्णयों की अंतिम जिम्मेदारी प्रोफेसर इंचार्ज पर निहित होती है। अतः ट्रामा सेंटर में किसी भी प्रकार का प्रशासनिक परिवर्तन, विशेषकर सुरक्षा व्यवस्था एवं संचालन प्रणाली से संबंधित, पूर्णतः प्रोफेसर ईबार्ज के अधिकार एवं वाचि के अंतर्गत आता है। कार में हाथियो सौरभ सिंह (प्रोफेसर इंचार्ज) के पास है, इसलिए ट्रामा सेंटर में हुई
किसी भी व्यवस्थागत विफलता के लिए उनकी पर्वविक्षीय एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से स्थापित होती है यह भी लेखनीय है कि ट्रामा सेंटर में बढ़ते मरीजों के दबाव को देखते हुए ऑपरेशन थिएटर के समय को रात्रि 10 बजे तक बढ़ाया गया, जिससे कार्यभार एवं जोखिम दोनों में वृद्धि हुऐसी स्थिति में अपेक्षित था कि सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सुदुद किया जाता, परंतु इसके विपरीत एक स्थादित सुरक्षा तंत्र को समाप्त कर दिया गया और पहचान संबंधी व्यवस्थाएँ पटना के बाद लागू की गड़ी यह तथ्य संस्थागत स्तर पर गंभीर लापरवाही को और अधिक स्पष्ट करता है।
उपरोक्त परिस्थितियों में यह स्पष्ठ है कि यह मात्र किसी एक चिकित्सक की बुटि नहीं, बल्कि व्यवस्थागत एवं प्रशासनिक स्तर पर हुई गंभीर विकलता का परिणाम है, जिसके कारण एक निदर्दोष व्यक्ति की मृत्यु हुई। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस प्रकरण में प्रो. रभ सिंह को काल प्रभाव से प्रोफेसर के पद से हटाया जाए,
एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित कर समस्त प्रशाभाविक विज्ञित्यु सुरक्षा प्रोटोकॉल की विफलता की जांच कराई जाए, केन की जाए तथा भविष्य में देशी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु मानकीकृत पहचान एवं भी आपरेटिव सत्यापन प्रणाली को सख्ती से लागू किया जाए साथ ही, जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना भी आवश्यक है, जिससे पारदर्शिता एवं जन-निवास बना रहे अतः आपसे अनुरोध है कि न्याय, जवाबदेही एवं संस्थान की प्रतिष्ठा की रक्षा हेतु इस प्रकरण में तत्काल एवं कठोर कार्रवाई करने की कृपा करें।











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