भदोही
कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) द्वारा 27 अप्रैल 2026 को भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के वैश्विक विस्तार को बढ़ावा देने हेतु कलीन भवन, मर्यादपट्टी, भदोही में सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) एवं द्विपक्षीय व्यापार समझौतों (BTAs) के तहत उपलब्ध अवसरों की जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने इन समझौतों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान उद्योग के विकास, नवाचार तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की पहचान को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।

सेमिनार में बड़ी संख्या में कालीन निर्यातकों एवं उद्योग से जुड़े सदस्यों ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने निर्यात वृद्धि, बाजार विविधीकरण एवं व्यापारिक चुनौतियों से निपटने के प्रभावी उपायों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर अमित कुमार, निदेशक, वस्त्र मंत्रालय ने अपने संबोधन में कहा कि, “एफटीए और बीटीए भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजारों के द्वार खोल रहे हैं।
विशेष रूप से हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र के लिए ये समझौते प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।” उन्होंने भदोही के कालीन निर्यातकों के लिए वर्ष 2030 तक 2 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही। साथ ही “15 देश–15 उत्पाद” नीति अपनाने पर बल दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि वाणिज्य मंत्रालय की एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन योजना के तहत विभिन्न प्रकार के टेस्ट और पंजीकरण पर लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने विभिन्न प्रकार के ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreements) के विषय में विस्तार से चर्चा की, जिसमें प्रमुख रूप से अमेरिका, यूरोपियन यूनियन (EU), ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूज़ीलैंड जैसे देशों/क्षेत्रों के साथ होने वाले व्यापारिक समझौतों और उनसे मिलने वाले निर्यात अवसरों पर भी चर्चा किया!
सेमिनार के दौरान CEPC की प्रशासनिक समिति के सदस्य इम्तियाज अहमद ने कालीन उद्योग के विकास में आ रही चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए धारा 43BH से संबंधित प्रावधानों को हटाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि इस नियम के कारण उद्योग को नुकसान हो रहा है। साथ ही 45 दिन की कैपिंग, कारपेट HSN कोड और उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष कालीन नीति की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
वहीं, CEPC के वाइस चेयरमैन असलम महबूब ने कहा कि, “निर्यातकों को इन समझौतों की शर्तों और प्रक्रियाओं की सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम उन्हें बदलते वैश्विक व्यापार परिवेश के अनुरूप तैयार करने में सहायक सिद्ध होते हैं।”
सेमिनार में हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि इस सेक्टर से जुड़े निर्यातक बदलते वैश्विक व्यापार ढांचे के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार कर सकें और अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें। विशेषज्ञों ने एफटीए/बीटीए के विकसित होते परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए और निर्यातकों को इनके प्रभावी उपयोग के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया।
यह सेमिनार भदोही के कालीन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिससे निर्यातकों को नए अवसरों की जानकारी मिली और उद्योग को आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ । इस कार्यक्रम का संचालन श्री पीयूष कुमार बरनवाल (सदस्य CEPC, सचिव, एकमा) द्वारा किया गया ।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कालीन निर्यातकों ने भाग लिया।,

जिसमे मुख्य अतिथि में अमित कुमार (निदेशक, वस्त्र मंत्रालय), के अलावा राजन जोशी (सहायक, डीजीएफटी), असलम महबूब (उपाध्यक्ष, CEPC), मोहम्मद रज़ा खान (अध्यक्ष, एकमा), पीयूष कुमार बरनवाल (सचिव, एकमा) तथा अशोक कुमार (सहायक, आयुक्त उद्योग) शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त CEPC की प्रशासनिक समिति के सदस्य मोहम्मद वासिफ अंसारी और इम्तियाज़ अहमद सहित अन्य सदस्य—अमित कुमार, सरिक अंसारी, प्रकाश चंद्र जायसवाल, इस्तियाक अहमद खान एवं आर.के. बोथरा भी उपस्थित रहे ।
रिपोर्ट – फारुख जाफरी









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