राघव चड्ढा ने राज्य सभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि हमने फैसला किया है कि हम, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए भाजपा में विलय कर लेंगे।
आम आदमी पार्टी के नेता और सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। साथ ही भाजपा में शामिल होने की भी घोषणा कर दी है। राघव के अलावा अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है।
भाजपा में कर लेंगे विलयराघव चड्ढा ने राज्य सभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि हमने फैसला किया है कि हम, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए भाजपा में विलय कर लेंगे।
इसके अलावा उन्होंने यह भी जानकारी दी कि स्वाति मालीवाल और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह भी भाजपा में शामिल होंगी।
‘गलत पार्टी में सही आदमी’राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने अपने खून-पसीने से पार्टी को सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए। उनके अनुसार, पार्टी अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब देश या राष्ट्रीय हित के लिए काम नहीं कर रही है। बल्कि, यह व्यक्तिगत लाभ के लिए कार्य कर रही है। चड्ढा ने महसूस किया कि वह गलत पार्टी में सही आदमी हैं।
मेरा मकसद देश के लिए कुछ बड़ा करने का- संदीप पाठकसंदीप पाठक ने इस दौरान कहा कि मैंने अपने जीवन में नहीं सोचा था ये स्थिति आएगी, और ये आ गई। मैं किसान परिवार से आया फिर पढ़ाई लिखाई की। मैं राजनीति में सिर्फ इस मकसद से आया कि देश के लिए कुछ बड़ा कर सकूं। देश सेवा के मकसद से ही आम आदमी पार्टी में जुड़ा था।
कैसे बिगड़ी थी बातदरअसल केजरीवाल और राघव चड्ढा में दूरियां उसी दिन से नजर आने लगी थी जब केजरीवाल जेल में थे और राघव अपनी पत्नी परिनीति के साथ लंदन में घूमते व मस्ती की फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे थे। राघव को लोकसभा चुनाव में भी पंजाब से दूर रखा गया।
औपचारिक तौर पर वे श्री आनंदपुर साहब सीट पर नजर आए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के अहम मुद्दों पर अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे थे। विपक्ष जहां इसे आप के अंदरूनी मतभेद का संकेत बता रहा है।
वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने इसे एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया करार दिया है, जिसका मकसद अन्य सांसदों को भी जिम्मेदारी देना है।











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