जौनपुर,
मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट के संस्थापक सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि कभी-कभी जीवन हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है। जहां दर्द ही हमारी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। एक बेटे के दिल में अपनी मां के प्रति अटूट प्रेम, उनके साथ हुए अन्याय का दर्द और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना ने एक ऐसी अलख जगाई, जो आज “मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट” के रूप में हजारों दिलों को जोड़ने का काम कर रही है।
यह सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष, त्याग और आशीर्वाद की जीवंत मिसाल है। नेत्रहीन और शारीरिक रूप से असहाय मां धर्मा देवी जी के जीवन में आए कठिन समय ने उनके छोटे पुत्र सुरेश कुमार शर्मा को झकझोर कर रख दिया। जब अपनी ही दुनिया बिखरती नजर आई, तब उन्होंने हार मानने के बजाय समाज को संवारने का संकल्प लिया।
एक विद्वान अधिवक्ता के मार्गदर्शन से जन्मी यह सोच आज एक मिशन बन चुकी है। ऐसा मिशन, जिसमें हर मां, हर बहन, हर जरूरतमंद को अपना परिवार समझा जाता है।
संस्थापक सुरेश कुमार शर्मा (पत्रकार) का यह स्पष्ट संदेश है। कि यह ट्रस्ट किसी जाति, धर्म या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के हर एक नागरिक के लिए है। यहां कोई छोटा-बड़ा नहीं, हर व्यक्ति इस परिवार का एक हिस्सा है।
आज यह ट्रस्ट शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। क्योंकि शिक्षा ही वह दीपक है। जो अंधकार को मिटाकर उजाले का रास्ता दिखाता है। अगर समाज का हर व्यक्ति मजबूत बनेगा, तो यह ट्रस्ट अपने आप मजबूत हो जाएगा।
सबसे खास बात यह है। कि इस मिशन में जुड़ने के लिए किसी बड़े धन की जरूरत नहीं है। संस्थापक का भावुक आह्वान है।
“यदि आप सक्षम हैं। तो प्रतिदिन मात्र 1 रुपये का सहयोग देकर भी इस परिवार को मजबूत बना सकते हैं।”
यह योगदान सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि एक विश्वास, एक अपनापन और एकता का प्रतीक है।
आज ट्रस्ट के पास सीमित संसाधन हैं। बायलॉज और पैन कार्ड जैसे शुरुआती कदम पूरे हो चुके हैं। लेकिन आगे की यात्रा में अभी कई पड़ाव बाकी हैं। जैसे बैंक खाता और आवश्यक दस्तावेज। यह सब तभी संभव है। जब हम सभी मिलकर एक कदम आगे बढ़ाएं।
संस्थापक बार-बार एक ही बात कहते हैं।
“पैसा नहीं, आपका साथ चाहिए… आपका विश्वास चाहिए… आपका समय चाहिए।”
आज जरूरत है। कि हम सब मिलकर सदस्यता अभियान को आगे बढ़ाएं, अपने आसपास के लोगों को जोड़ें और इस सेवा के कारवां को एक जनआंदोलन बना दें।
इस ट्रस्ट की सबसे बड़ी सीख है।
किसी के साथ विश्वासघात मत करिए, क्योंकि जब एक विश्वास टूटता है। तो पूरा परिवार बिखर जाता है।
अगर कोई आपकी आलोचना करता है। या आपको बुरा कहता है। तो उसे भी अपना मानिए।क्योंकि वही आपको आगे बढ़ने का रास्ता दिखा रहा है।
इसी कड़ी में प्रख्यात यूपीएससी कोच, लेखक एवं मोटिवेशनल स्पीकर संदीप कुमार ने भी इस पहल को सराहते हुए ट्रस्ट के साथ जुड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की इच्छा जताई है। यह ट्रस्ट के लिए एक नई ऊर्जा और विश्वास का संकेत है।
आइए, हम सब मिलकर इस सेवा की ज्योति को और प्रज्वलित करें।
एक मां के आशीर्वाद से शुरू हुई यह यात्रा, हम सबके सहयोग से एक विशाल परिवार बन सकती है।
आपका एक छोटा सा कदम, किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है।










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