मिर्जापुर।
नगर के मध्य स्थित प्राचीन बाबा बूढ़ेनाथ मंदिर में करीब 90 वर्षों बाद व्यापक जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया गया है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य के दौरान भी श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए जल चढ़ाने और पूजन की व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी।
मंदिर के महंत डॉ. योगानंद गिरी ने बताया कि इससे पूर्व वर्ष 1630 में तत्कालीन महंत के नेतृत्व में मंदिर की मरम्मत कराई गई थी। अब लंबे अंतराल के बाद पुनः मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ किया गया है, जिससे इसकी संरचना को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाया जा सके।
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में स्थित एक विशाल पीपल का वृक्ष समय के साथ सूखकर गिर गया था, जिसकी जड़ें जमीन में ही रह गई थीं। इन जड़ों के कारण मंदिर की फर्श धीरे-धीरे धंसने लगी थी, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। इसी खतरे को देखते हुए श्रद्धालुओं के सहयोग से जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया गया।
जीर्णोद्धार के दौरान मंदिर का एक हिस्सा अस्थायी रूप से बंद रहेगा, लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग और पूजन स्थल की व्यवस्था की गई है, जिससे भक्त जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर सकें।
नवरात्र की पंचमी तिथि पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर कार्य का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर महंत डॉ. योगानंद गिरी के साथ भाजपा नेता गौरव ऊमर, हृदय राज एसोसिएशन के शैलेंद्र पांडेय व शिवेंद्र पांडेय उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार आचार्य नितिन अवस्थी द्वारा संपन्न कराया गया।
मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस क्षेत्र में यह स्थित है, वह आज भी “बूढ़ेनाथ मोहल्ला” के नाम से जाना जाता है। स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।
प्रशासन और मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्माण कार्य के दौरान सहयोग करें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही दर्शन-पूजन करें, ताकि कार्य भी सुचारु रूप से चलता रहे और भक्तों की आस्था भी बनी रहे।










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