गाजियाबाद की राज एम्पायर सोसायटी में एक फ्लैट के बाहर अब पहले जैसा शोर नहीं है। कुछ दिन पहले तक यहां लोगों की भीड़ लगी रहती थी। कोई हालचाल पूछने आता, कोई दुआ करता। लेकिन अब यहां सन्नाटा है।
दरवाजे के पास रुकते ही पड़ोसियों के चेहरे पर भारीपन साफ दिखता है, क्योंकि इसी घर का बेटा हरीश राणा अब दिल्ली के एम्स में जिंदगी से विदा लेने की तैयारी में है। करीब 13 साल पहले हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था।
परिवार को उम्मीद थी कि वह गांव का पहला इंजीनियर बनेगा। लेकिन यूनिवर्सिटी की चौथी मंजिल से गिरने के बाद सब कुछ बदल गया। गंभीर चोट के बाद हरीश कोमा में चला गया। शरीर ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि उसके ठीक होने की संभावना लगभग खत्म है।
सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद दिल्ली एम्स में हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पोषण और पानी देने वाली नली हटा दी गई है। ऑक्सीजन सपोर्ट बंद कर दिया गया है। डॉक्टर फिलहाल उन्हें ब्रेन से जुड़ी दवाइयां दे रहे हैं।
राज एम्पायर सोसायटी के पड़ोसी कहते हैं कि इस परिवार ने 13 साल तक उम्मीद नहीं छोड़ी। आज जब हरीश जिंदगी की आखिरी दहलीज पर है, तो पूरा इलाका इस दर्द को महसूस कर रहा है।










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