वाराणसी : शहर के सिगरा थाना क्षेत्र स्थित इंग्लिशिया लाइन इलाके में एक प्राचीन मंदिर के जर्जर हिस्से को ढहाने की कार्रवाई एक बार फिर टल गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश और मौके पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद नगर निगम की टीम बिना ध्वस्तीकरण किए ही वापस लौट गई, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि यह मंदिर आजादी से पहले का बना हुआ है और इसका संचालन एक निजी ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। मंदिर के एक हिस्से की हालत काफी जर्जर हो चुकी है, जिसे लेकर नगर निगम ने वर्ष 2021 में ही निरीक्षण के बाद उसे खतरनाक घोषित करते हुए नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर मामला न्यायालय तक पहुंच गया।
याचिकाकर्ता विवेक सेठ ने इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच ने नगर निगम को दो सप्ताह के भीतर जर्जर हिस्से को ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बुधवार को दोपहर 12 बजे नगर निगम की टीम कार्रवाई के लिए इंग्लिशिया लाइन पहुंची। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
हालांकि, मौके पर स्थिति अचानक बदल गई। याचिकाकर्ता विवेक सेठ का आरोप है कि कुछ अधिवक्ताओं के वहां पहुंचने और प्रशासन पर दबाव बनाने के बाद नगर निगम की टीम ने कार्रवाई से कदम पीछे खींच लिए। उनका कहना है कि टीम ने न तो कोई लिखित कारण बताया और न ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की।
विवेक सेठ का कहना है कि मंदिर का जर्जर हिस्सा कभी भी गिर सकता है, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने इस मंदिर का निर्माण विधि-विधान से कराया था, लेकिन अब जर्जर ढांचा पूरे मंदिर के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है।
फिलहाल नगर निगम की टीम ने दो दिन का समय मांगते हुए आश्वासन दिया है कि दोबारा कार्रवाई की जाएगी। वहीं कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है और सभी की निगाहें अब अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला










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