महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि योगी सरकार सुनियोजित तरीके से संत परंपरा की गरिमा को ठेस पहुँचा रही है।हाल के घटनाक्रम में शंकराचार्य परंपरा से जुड़े संत को बदनाम करने का जो प्रयास हुआ है, वह अत्यंत निंदनीय और चिंताजनक है।आदि गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपरा भारतीय सनातन धर्म की आत्मा है, और उस परंपरा से जुड़े पूज्य संतों के सम्मान से कोई भी सरकार ऊपर नहीं हो सकती।योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की सत्ता असहमति की हर आवाज को दबाने की प्रवृत्ति अपना रही है।जब कोई शंकराचार्य सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाता है और उसके बाद उन्हें ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश होती है,
तो यह साफ संकेत है कि सरकार संवाद से डर रही है,विशेष रूप से स्वामी अवमुक्तेश्वरानंद जी से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि कुंभ जैसे पवित्र अवसर पर यदि संतों के सम्मान की रक्षा नहीं हो पा रही, तो यह सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।सनातन धर्म समन्वय, सहिष्णुता और शास्त्रार्थ की परंपरा पर आधारित है, लेकिन वर्तमान सरकार उसे राजनीतिक ढाल बनाने का प्रयास कर रही है।जो सरकार खुद को सनातन की एकमात्र संरक्षक बताती है, उसे सबसे पहले संतों और धर्माचार्य आचार्यों के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए,प्रदेश में शासन शैली अत्यधिक केंद्रीकृत और दमनात्मक होती जा रही है।लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए,
न कि उसे दबाने या बदनाम करने की कोशिश।मुख्यमंत्री जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि होते हैं, कोई राजा नहीं।यदि संत समाज की आवाज भी सरकार को असुविधाजनक लगने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए घातक है हम प्रदेश सरकार से मांग की है कि शंकराचार्य परंपरा से जुड़े संत के संदर्भ में हुई घटनाओं पर स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक की जाए और संत समाज की गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जाए कांग्रेस संत परंपरा के सम्मान और सनातन की मूल भावना की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाती रहेगी।









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