अम्बेडकरनगरजनपद के विकास खंड जहांगीरगंज में खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडेय की करीब तीन वर्षों से लगातार एक ही स्थान पर तैनाती ने शासन की तबादला नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन हर वर्ष अधिकारियों के स्थानांतरण की नीति जारी करता है, लेकिन जहांगीरगंज स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र, देवरिया बाजार में यह नीति केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि तबादला क्यों नहीं हुआ, बल्कि यह भी है कि आखिर किसके संरक्षण में नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। लंबे समय से एक ही कुर्सी पर जमे रहना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि यहां नियमों से ज्यादा रसूख और पहुंच असरदार है।तीन साल, एक कुर्सी और बढ़ती शिकायतें स्थानीय शिक्षकों, कर्मचारियों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लंबे समय से एक ही अधिकारी की तैनाती के चलते कार्यालयी व्यवस्था एकतरफा हो गई है।
फाइलें महीनों तक लंबित रहती हैं, आम नागरिकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगवाए जाते हैं और शिकायतों के निस्तारण में गंभीरता नहीं दिखाई जाती।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब किसी शिक्षक या शिक्षिका विद्यालय की कमियों को लेकर लिखित शिकायत दी जाती है, तो कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ता को ही परेशान किया जाता है।
आरोप है कि संबंधित कर्मियों से खंड शिक्षा अधिकारी का तालमेल हो जाता है और शिकायतें दबा दी जाती हैं। रसमलाई और काजू कतरी की मिठाई और साथ में जेब गरम करने के आरोपशिकायतकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ मामलों में कार्रवाई से बचने के लिए संबंधित अध्यापकों की ओर से खंड शिक्षा अधिकारी की आवभगत की जाती है।
आरोप है कि मिठाइयों और अन्य लाभ के जरिए माहौल बनाया जाता है जिसके बाद शिकायतों को कमजोर कर दिया जाता है या फाइलों में दबा दिया जाता है।
हालांकि ये सभी आरोप हैं लेकिन बार-बार उठ रही शिकायतें विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े करती हैं।शिकायतकर्ताओं से दुर्व्यवहार के भी आरोप कई शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे बार-बार अपनी शिकायत की प्रगति जानने कार्यालय पहुंचते हैं तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।
उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि जांच चल रही हैजबकि महीनों तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आती।जिला स्तर से संरक्षण की चर्चा विभागीय सूत्रों में यह चर्चा आम है कि खंड शिक्षा अधिकारी को जिला स्तर से संरक्षण प्राप्त है।
कहा जा रहा है कि चहेते होने के कारण ही उनका तबादला अब तक नहीं किया गया। यही वजह है कि शासन की तबादला नीति जहांगीरगंज में बेअसर नजर आ रही है।नियम सिर्फ कमजोरों के लिएक्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी वर्षों तक एक ही स्थान पर जमे रहेंगे तो निष्पक्ष प्रशासन की उम्मीद बेमानी हो जाएगी।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या तबादला नीति सिर्फ छोटे कर्मचारियों के लिए है, जबकि रसूखदार अफसरों के लिए नियम बदल जाते हैंकब तय होगी जवाबदेही अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग कब इस पूरे मामले का संज्ञान लेगा।
क्या शासन तबादला नीति को लेकर सख्ती दिखाएगा या फिर जहांगीरगंज यूं ही अधिकारियों के लिए सेफ ज़ोन बना रहेगा जनता जवाब चाहती हैतबादला कब होगा या फिर संरक्षण हमेशा नियमों पर भारी पड़ता रहेगा।
रिपोर्ट – पंकज कुमार










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