गाजीपुर- गाजीपुर जिला के मनिहारी ब्लॉक के हरिहरपुर गांव में रहने वाले चौथीराम का 12 वर्षीय इकलौता बेटा शिवम न बोल पाता है और न ही सामान्य रूप से चल-फिर सकता है। कमर के नीचे का हिस्सा और पैर सूख चुके हैं। मानसिक रूप से कमजोर शिवम केवल इशारों से बात समझता है। बेटे की यह हालत देखकर मां शर्मिला बार-बार फफक पड़ती हैं। उनका कहना है कि शिवम को 12 दिन की उम्र में तेज बुखार आया था, इसके बाद झटके पड़ने लगे और धीरे-धीरे वह गंभीर दिव्यांगता का शिकार हो गया।
यह दर्द सिर्फ शिवम और उसकी मां का ही नहीं है। जिले के सदर, मनिहारी और देवकली ब्लॉकों के 11 गांवों में ऐसे 43 बच्चे और युवा हैं, जो बीते करीब 15 वर्षों से इसी तरह की रहस्यमय बीमारी से पीड़ित हैं। प्रभावित गांवों में बहादीपुर, हरिहरपुर, हाला, शिकारपुर, धारीकला, तारडीह, भौरहा, बुढ़नपुर, राठौली सराय, खिजीरपुर और खुटहन शामिल हैं। मंगलवार को मीडिया की टीम ने बहादीपुर, हाला, हरिहरपुर और चौहान बस्ती पहुंचकर पीड़ित परिवारों से बातचीत की।
सदर ब्लॉक के फत्तेहउल्लाहपुर अंतर्गत बहादीपुर गांव की रमिता देवी ने बताया कि उनकी बेटी सोनी तीन साल तक बिल्कुल सामान्य थी। अचानक एक दिन उसे तेज बुखार आया और वह बेहोश हो गई। इलाज के लिए वाराणसी ले जाने पर डॉक्टरों ने बताया कि उसके दिमाग की नस फट चुकी है। इसके बाद वह मानसिक रूप से कमजोर हो गई और उसके हाथ-पैर टेढ़े हो गए। रमिता देवी की आंखों में बेबसी साफ झलकती है। पति के निधन के बाद उनके पास इतना साधन नहीं है कि बेटी का बेहतर इलाज करा सकें। अब बेटी की उम्र करीब 18 साल है, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। मां को उसके भविष्य की चिंता सताए जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक न तो बीमारी की ठोस वजह सामने आई है और न ही प्रभावितों को समुचित इलाज या सहायता मिल पाई है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की गहन जांच कराकर स्थायी समाधान और पीड़ित परिवारों को राहत देने की मांग की है।











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