मणिपुर से लौटे विद्यार्थी, अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम रहा अत्यंत सफल

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भारत सरकार के पूर्वोत्तर परिषद (NEC) एवं DoNER मंत्रालय द्वारा आयोजित “अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान–प्रदान कार्यक्रम (FY 2025–26)” के अंतर्गत उत्तर प्रदेश से चयनित 19 विद्यार्थियों का दल 14 दिवसीय शैक्षणिक–सांस्कृतिक यात्रा पूर्ण कर मणिपुर से सकुशल वाराणसी लौटा। यह कार्यक्रम केवल शैक्षणिक भ्रमण नहीं था, बल्कि उत्तर–पूर्व भारत की संस्कृति, इतिहास और जीवनशैली को महसूस करने और राष्ट्रीय एकता को जीवंत बनाने का एक उत्कृष्ट अवसर रहा।

एनआईटी मणिपुर में आयोजित शैक्षणिक सत्रों, योग अभ्यास, प्रशासनिक संवाद तथा ऐतिहासिक–सांस्कृतिक स्थलों के भ्रमण से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, राष्ट्रीय चेतना और नागरिक उत्तरदायित्व का विकास हुआ। इस दौरान प्रत्येक छात्र ने व्यक्तिगत और समूह प्रस्तुति (PPT) के माध्यम से मणिपुर के युवाओं को उत्तर प्रदेश की प्रगति, सरकार की योजनाएँ, लोकसंस्कृति और “वन प्रोडक्ट–वन दृष्टिकोण” की जानकारी दी, जिससे सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान–प्रदान और भी सार्थक हुआ।

विद्यार्थियों ने पारंपरिक मणिपुरी नृत्य और भोजन तथा प्रकृति–पर्यटन का आनंद लिया, जिससे उनके अनुभव और अधिक समृद्ध हुए। मणिपुर के विद्यार्थियों द्वारा उत्तर प्रदेश की विविध संस्कृति और सामाजिक विकास को साझा करना इस कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि रही। DoNER मंत्रालय से पधारे नीरज सिंह ने छात्रों से संवाद करते हुए उनके आत्मविश्वास, सक्रिय भागीदारी और उत्तर–पूर्व भारत एवं उत्तर प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका की खुले दिल से सराहना की। इस प्रेरक समर्थन ने कार्यक्रम को अत्यंत सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और विद्यार्थियों के अनुभव को और यादगार बनाया।

कार्यक्रम की सफलता में छात्र अधिष्ठाता डॉ. रंजन सिंह का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। प्रतिभागियों की हर गतिविधि पर ध्यान रखते हुए उन्हें मार्गदर्शन और सलाह दी। इसके साथ ही, डॉ. स्वप्ना मीणा (नोडल अधिकारी, BHU) ने पूरे 14 दिनों तक विद्यार्थियों के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर उन्हें मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान किया, जिससे कार्यक्रम सहज, प्रभावशाली और सफल बन पाया।
प्रतिभागियों ने एनआईटी मणिपुर के प्रशासन, शिक्षकगण और स्वयंसेवकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। साथ ही, डॉ. मंजू सिंह (नोडल अधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार), डॉ. स्वप्ना बंध्योपाध्याय और डॉ. अशोक कुमार सोनकर के मार्गदर्शन और सहयोग को विशेष रूप से सराहा गया।

अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान–प्रदान कार्यक्रम छात्रों के लिए केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समझ और नेतृत्व विकास की प्रेरणादायक सीख बनकर स्थायी प्रभाव छोड़ गया। मणिपुर और उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों के बीच यह आदान–प्रदान न केवल ज्ञानवर्धक था, बल्कि दोनों प्रदेशों के सामाजिक–सांस्कृतिक संवाद और दोस्ती को भी सशक्त बनाने वाला साबित हुआ।

 

रिपोर्ट धनेश्वर साहनी

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