जिन पंडितों को शादी में दक्षिणा लेने पर गालियां दी जाती हैँ वो पंडित जी तो महिलाओं को तिलक भी स्वयं नहीं लगाते हैं !!
पर शादी में अब साड़ी ब्लाउज इत्यादि पहनाने वालों को बुलाया जाने लगा है या इन औरतों को ही सेंटरों पर बुलाया जाने लगा है ! अब किसी भी अवसर पर महिलाओं को साड़ी पहनाने से लेकर, मेहंदी, सैलून, टेलर, टैटू सब काम पुरुष कर रहे हैं
ये कथित आधुनिकता समाज को कहाँ तक ले जाएगी……?
मेहंदी के बाद अब महिलाओं को साड़ी पहनना भी सेंटरों पर पुरुष सिखा रहे हैं! एक गैर पुरूष द्वारा साड़ी खींचने पर जिस देश में महाभारत हो गई थी उस भारत में स्त्री खुद साड़ी उतारने खड़ी है ! हां आज औरतें स्वयं ही परपुरुष से न केवल जिम में अपने निजी अंगों का स्पर्श सुख भोग रही है बल्कि साड़ी भी उतार पहन रही हैं।।
ये प्रगति नहीं है …
संस्कारों का पतन ही हमारी मृ’त्यु है ??











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