सकलडीहा (चंदौली)
उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रामीण स्वच्छता और ‘स्वच्छ भारत मिशन’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएँ सकलडीहा विकास खंड क्षेत्र में दम तोड़ती नज़र आ रही हैं। सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों और व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए भले ही ग्राम प्रधानों को प्रशासक का दायित्व सौंप दिया गया है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सकलडीहा क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में चारों तरफ गंदगी और जलजमाव का साम्राज्य फैला हुआ है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासकों की नियुक्ति के बाद भी गाँवों में साफ-सफाई के नाम पर कोई ठोस काम नहीं हो रहा है।
सकलडीहा नागेपुर, टिमिलपुर, अलमपुर और आसपास की ग्राम सभाओं के मुख्य मार्गों और गलियों में नालियों का पानी ओवरफ्लो होकर बह रहा है। नियमित सफाई न होने के कारण नालियाँ पूरी तरह चोक हो चुकी हैं और सड़कों पर कीचड़ जमा है, जिससे राहगीरों, विशेषकर स्कूली बच्चों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्र की ग्राम सभा में आदि हिंदू प्राथमिक विद्यालय परिसर और मिनी सचिवालय के आसपास भी कूड़े का ढेर और जलजमाव लगा हुआ है, जिससे संक्रामक बीमारियों (जैसे डेंगू और मलेरिया) के फैलने का खतरा मंडरा रहा है। भीतरी सूत्रों और कुछ प्रशासकों के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले और ब्लॉक स्तर पर भुगतान प्रक्रिया (पेमेंट डंप) बाधित होने के कारण भी विकास और सफाई कार्यों की गति थमी हुई है।
सफाईकर्मियों की लापरवाही और कागजों पर ही तैनाती होने के कारण भी सफाई व्यवस्था वेंटिलेटर पर पहुँच गई है। डस्टबिन और अन्य सफाई उपकरण पंचायत भवनों में धूल फांक रहे हैं लेकिन उनका उपयोग सड़कों पर नहीं दिख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल और उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन ज़िम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस मामले में उदासीन बने हुए हैं।
ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि जल्द ही जल निकासी की समुचित व्यवस्था, नालियों की सफाई और सामुदायिक शौचालयों का संचालन शुरू नहीं कराया गया, तो वे ब्लॉक मुख्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को विवश होंगे।
रिपोर्ट – आलिम हाशमी










Users Today : 48
Users This Year : 24277
Total Users : 36870
Views Today : 144
Total views : 72518