वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र अंतर्गत नगवा स्थित गंगाबाग कॉलोनी में रास्ते को लेकर चल रहा विवाद अब लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर न्यायालय एवं कमिश्नर कार्यालय के आदेशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
मामले में सोमनाथ सोनकर पुत्र स्वर्गीय लाल सोनकर, पृथ्वीराज मौर्य पुत्र शिव प्रसाद मौर्य एवं क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि जिस रास्ते को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है, वह कुल 24 फीट चौड़ा मार्ग है। उनका कहना है कि यह रास्ता किसी सरकारी भूमि पर नहीं बल्कि तीन लोगों द्वारा अपनी निजी जमीन से छोड़ी गई भूमि पर बनाया गया है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार प्रथम 8 फीट रास्ता नागेंद्र मिश्रा द्वारा छोड़ा गया, दूसरा 8 फीट सोमनाथ सोनकर द्वारा तथा तीसरा 8 फीट पृथ्वीराज मौर्य द्वारा छोड़ा गया था। तीनों हिस्सों को मिलाकर कुल 24 फीट का रास्ता तैयार हुआ, जिसका उपयोग वर्षों से स्थानीय आवागमन के लिए किया जाता रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता निजी सहमति और सुविधा के आधार पर छोड़ा गया था, ताकि कॉलोनी में रहने वाले लोगों को आने-जाने में दिक्कत न हो। लेकिन समय के साथ कुछ लोगों ने इसे सरकारी सड़क बताना शुरू कर दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि लगभग 14 वर्ष पूर्व इस रास्ते पर डमरू बिछाया गया था, जिसके बाद धीरे-धीरे इसे सार्वजनिक सरकारी मार्ग के रूप में प्रचारित किया जाने लगा।
विवाद उस समय और अधिक बढ़ गया जब रामभरत ओझा की पत्नी सीमा ओझा द्वारा कथित रूप से गंगाबाग कॉलोनी की तरफ पीछे की ओर एक नया दरवाजा निकाल दिया गया। सोमनाथ सोनकर एवं अन्य स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीमा ओझा एवं उनके परिवार द्वारा इस निजी रास्ते को सरकारी रास्ता बताकर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
उनका कहना है कि संबंधित भूमि के दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से केवल निजी रास्ते का उल्लेख है, जबकि सीमा ओझा के मकान संबंधी कागजातों में पश्चिम दिशा अथवा गंगाबाग कॉलोनी की तरफ किसी रास्ते का उल्लेख नहीं है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार जब इस मामले को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई तो विवाद बढ़ता चला गया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेजों में रास्ता दर्ज नहीं है, तो उस दिशा में नया मार्ग खोलना नियमों के विपरीत है। इसके बावजूद कथित रूप से गंगाबाग कॉलोनी की तरफ रास्ता खोलने और आवागमन शुरू करने का प्रयास किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया।
मामले को लेकर वर्ष 2022 में न्यायालय में सुनवाई हुई थी। उप जिलाधिकारी सदर वाराणसी कार्यालय से 9 नवंबर 2022 को जारी आदेश में थाना लंका को हस्तक्षेप कर विवादित रास्ते को बंद कराने का निर्देश दिया गया था।
आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि सीमा ओझा पत्नी रामभरत ओझा द्वारा गंगाबाग कॉलोनी की तरफ जबरन रास्ता खोला जा रहा है, जिस पर क्षेत्रीय लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। साथ ही यह भी कहा गया था कि सीमा ओझा के मकान संबंधी कागजातों में पश्चिम दिशा की ओर किसी प्रकार के रास्ते अथवा आवागमन का उल्लेख नहीं पाया गया।
उप जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा थाना लंका को निर्देशित किया गया था कि संबंधित विवादित रास्ते को तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए तथा क्षेत्रीय लोगों एवं प्रशासन को भ्रमित करने के आरोप में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि न्यायालयीय आदेश के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
सोमनाथ सोनकर का कहना है कि उन्होंने कई बार थाना लंका एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका
आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है और कॉलोनी का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि समय रहते प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दस्तावेजों की पड़ताल करता तो मामला काफी पहले ही समाप्त हो सकता था।
पीड़ित पक्ष द्वारा इस मामले की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई। शिकायत कमिश्नर कार्यालय तक पहुंची, जिसके बाद कमिश्नर कार्यालय की ओर से भी थाना लंका को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बावजूद इसके, स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी। लगातार कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार मानसिक रूप से परेशान और सदमे में है।
हाल ही में भेलूपुर जोनल टीम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची थी। पीड़ित पक्ष के अनुसार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सामान हटाने के निर्देश दिए, लेकिन इस दौरान प्रशासन द्वारा जमीन के मूल कागजात देखने की आवश्यकता तक नहीं समझी गई।
इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और अधिक बढ़ गई। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन दोनों पक्षों के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच करे तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और पूरा विवाद समाप्त हो सकता है।
सोमनाथ सोनकर, पृथ्वीराज मौर्य एवं क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय एवं कमिश्नर कार्यालय के आदेशों का पालन करते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में किसी प्रकार की अप्रिय घटना घटती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी। वहीं स्थानीय लोग भी जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि कॉलोनी में शांति, सुरक्षा और सामान्य व्यवस्था बनी रह सके।










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