गोरखपुर ‘विरासत गलियारा’ निर्माण बना ‘मौत का जाल’: गड्ढों में समा रहे मासूम, PWD के ठेकेदार की ‘वसूली’ पर मचा बवाल!

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गोरखपुर:  विकास के नाम पर चल रहा ‘विरासत गलियारा’ (हेरिटेज कॉरिडोर) का निर्माण कार्य अब स्थानीय लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रह गया है। अलीनगर से थवई के पुल के बीच चल रहे सड़क निर्माण कार्य में बरती जा रही घोर लापरवाही के कारण न केवल लोगों का जीना मुहाल हो गया है, बल्कि यह इलाका अब ‘मौत का कुआं’ बनता जा रहा है।

सिलसिलेवार हो रहे हादसे

बीती रात लगभग 8 बजे इस निर्माणाधीन सड़क पर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। निर्माण कार्य के दौरान छोड़े गए गहरे गड्ढे में पहले एक मासूम बच्ची डूब गई, उसे बचाने के प्रयास में एक महिला भी गड्ढे में गिर गई। अफरा-तफरी के बीच थोड़ी ही देर बाद एक बोलोरो गाड़ी भी अनियंत्रित होकर उसी गड्ढे में धंस गई। गनीमत रही कि स्थानीय लोगों की जागरूकता से सभी की जान बचा ली गई, अन्यथा एक बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

ठेकेदार की शर्मनाक करतूत: जान बचाने के लिए मांगे 5,000 रुपये!
हद तो तब हो गई जब इस हादसे के बाद PWD विभाग के ठेकेदार ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय वसूली शुरू कर दी। आरोप है कि गड्ढे में धंसी बोलोरो गाड़ी को बुलडोजर से बाहर निकालने के लिए ठेकेदार ने मालिक से 5,000 रुपये की मांग की। मौके पर मौजूद लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि विभाग के अधिकारी न केवल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, बल्कि ठेकेदार भी खुलेआम मनमानी कर रहे हैं।

15 दिनों से पानी का संकट, ठप पड़ा व्यापार

सड़क निर्माण की अव्यवस्था ने आम जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है:

पानी की किल्लत: पिछले 15 दिनों से घरों में जलापूर्ति ठप है। लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं और मजबूरन अपना घर छोड़कर अन्य स्थानों पर पलायन कर रहे हैं।

व्यापार पर ताला: निर्माण कार्य में लचर प्रबंधन के कारण अलीनगर-थवई मार्ग पर व्यापार पूरी तरह बंद हो चुका है।

समन्वय का अभाव: स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभिन्न विभागों (PWD और अन्य) के बीच किसी प्रकार का तालमेल नहीं है। विकास के नाम पर खोदी गई सड़कों ने लोगों का निकलना दूभर कर दिया है।

प्रशासन कब जागेगा?

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि PWD के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह लापरवाह हैं। लोगों का कहना है, “क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? कब तक हम विकास के नाम पर यह मानसिक और शारीरिक यातना झेलते रहेंगे?”

समय रहते यदि प्रशासन ने कार्य में तेजी लाकर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए, तो यह ‘विरासत गलियारा’ जिले के लिए एक काला अध्याय साबित हो सकता है।

रिपोर्ट –  जगदीश शुक्ला

 

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