इस फैसले के साथ ही उनका लाइफ सपोर्ट और फीडिंग ट्यूब हटाने की अनुमति मिल गई है।
फैसला सुनाते समय जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच भावुक हो गई। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को आधार बनाया, जिसमें स्पष्ट था कि हरीश के ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है और अब ‘प्रकृति को अपना काम करने देना चाहिए।’
साल 2013 में चंडीगढ़ में चौथी मंजिल से गिरने के कारण हरीश के सिर में गंभीर चोट आई थी और उनका शरीर 100% लकवाग्रस्त हो गया था। तब से वे पूरी तरह से ट्यूब द्वारा दिए जा रहे तरल भोजन पर निर्भर थे।
उनके वृद्ध माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर यह जीवन-रक्षक इलाज रोकने की गुहार लगाई थी। मेडिकल टीम और सभी पक्षों से लंबी चर्चा के बाद, कोर्ट ने आज इस अपील को स्वीकार कर लिया है।










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