वाराणसी में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति सजग बनाना तथा दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु व्यवहारगत परिवर्तन को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मनोज वर्मा, आर.टी.ओ. प्रवर्तन, वाराणसी रहे। विशिष्ट अतिथियों में राघवेंद्र सिंह, आर.टी.ओ. प्रशासन, सुधांशु रंजन, ए.आर.टी.ओ. प्रवर्तन, लोकप्रिय बिरहा लोकगायक डॉ. मन्नू यादव तथा मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉ. ओ.पी. चौधरी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. चंद्रमणि सिंह के संबोधन से हुई। उन्होंने विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा को कक्षा अनुशासन के समान आवश्यक बताते हुए यातायात नियमों के पालन पर जोर दिया।
सुधांशु रंजन, ए.आर.टी.ओ. प्रवर्तन ने भारत में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्व के कुल वाहनों का मात्र 1 प्रतिशत भारत में है, किंतु सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु में भारत की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत है।
डॉ. ओ.पी. चौधरी ने बच्चों में जागरूकता के मनोवैज्ञानिक पक्ष पर चर्चा करते हुए कहा कि बच्चे नियमों का पालन और दूसरों की नकल करके सीखते हैं, इसलिए परिवार और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राघवेंद्र सिंह, आर.टी.ओ. प्रशासन ने वाहन चलाने से पूर्व वैध ड्राइविंग लाइसेंस के महत्व पर जोर दिया तथा बताया कि यदि नाबालिग बिना वैध लाइसेंस वाहन चलाते पाए जाते हैं तो अभिभावकों पर ₹25,000 का जुर्माना तथा 6 माह तक की सजा का प्रावधान है।
मुख्य अतिथि मनोज वर्मा ने मानव जीवन के मूल्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लापरवाह सड़क व्यवहार से अनमोल जीवन नष्ट नहीं होना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे घर जाकर अपने परिवार और समाज को भी सड़क सुरक्षा नियमों के पालन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने ओवरस्पीडिंग से बचने, गलत दिशा में वाहन न चलाने, वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग न करने, दोपहिया वाहन पर दोनों सवारों के लिए हेलमेट तथा सभी यात्रियों के लिए सीट बेल्ट के उपयोग जैसी सावधानियों को अपनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डॉ. मन्नू यादव द्वारा सड़क सुरक्षा विषय पर प्रस्तुत की गई प्रेरक बिरहा गायन प्रस्तुति रही, जिसमें सुरक्षित लेन ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग से बचाव आदि संदेशों को प्रभावशाली ढंग से रखा गया। विद्यार्थियों ने उनकी प्रस्तुति को खूब सराहा और उससे गहराई से जुड़ाव महसूस किया।
इस कार्यक्रम में कुल लगभग 3000 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें अधिकांश ग्रामीण पृष्ठभूमि से थे। आयोजन ने छात्रों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।











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