सबसे पहले तो आते ही लिस्टिंग रिफॉर्म्स किए. इससे पूर्व तक सर्वोच्च न्यायालय में चंद बड़े वकीलों की दादागिरी चलती थी. उनके कहने पर अदालतें रात में भी खुल जाती थीं, उनके केस की सुनवाई सीधे हो जाती थी. यदि आप रसूखदार हैं, पैसे वाले हैं तो ऐसे वकील के माध्यम से सुनवाई हो जायेगी, आम जनता के केस की कोई सुनवाई न थी. अब सभी केस एक सुनिश्चित प्रक्रिया से होते हुवे ही अदालत पहुचेंगे. सभी केआर लिए समान मौका.
माननीय मुख्य न्यायधीश ने रोहंगियों को अवैध घुसपैठिया घोषित किया और शरणार्थी मानने से इंकार कर दिया. तर्क एकदम उचित है कि इस देश में ही करोड़ों गरीब लोग हैं जिन्हें बेसिक सुविधाएं तक उपलब्ध नौईं हैं. वहीं दूसरी ओर हैं अवैध घुसपैठिये जो सुरंग खोद कर, सीमा फाँद कर भारत में घुस आते हैं फिर अदालत से उनके लिए समान अधिकार, ग्रीव हैं भोजन दो जैसी वकालत की जाती है.
माना यह भी जा रहा है कि जस्टिस सूर्यकांत लंबे समय से सरकार के एजेंडा पर चल रहे जुडिसियल रिफॉर्म्स में भी सहयोग देंगे और कोलोजियम सिस्टम का खात्मा होगा. वैसे देखना यह भी है कि चीफ जस्टिस कब तक राइट विंग की आंखों के सितारे रहते हैं. पूर्व में भी ऐसा सदैव हुआ है कोई बड़ा वकील, कोई जस्टिस, सेलेब्रिटी, लेखक जैसे ही राइट विंग के मुद्दों के प्रति सहानुभूति दर्शाता नजर आता है, राइट विंग समर्थक उसमें कोई न कोई कमी निकाल सबसे ज्यादा उसकी ही आलोचना कर उसे अपने खेमे से भगा देते हैं.

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी











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