उन्होंने अपने यज्ञ की रक्षा हेतु राजा श्री दशरथ जी से श्री रामचंद्र एवं श्री लक्ष्मण जी को ले गए तथा श्री पंचमुखी हनुमान जी मंदिर श्री रामघाट गोलाघाट गंगा जी के किनारे
दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल से लाकर स्थापित 35 फीट की विशाल हनुमान जी की प्रतिमा पर सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा का पाठ हुआ तथा प्रसाद वितरित किया गया












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